नेपाल-तिब्बत सीमा पर कुदरत का कहर: 500 से अधिक मौतें, करीब 1,000 लापता; 320 भारतीयों से अभी तक संपर्क नहीं
नेपाल-तिब्बत सीमा के हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने से आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। विभिन्न ताजा रिपोर्टों के अनुसार मृतकों की संख्या 500 से अधिक पहुंच चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। भारत सरकार के अनुसार करीब 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जबकि बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर तबाही, सैकड़ों की मौत
काठमांडू/नई दिल्ली। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा से लगे हिमालयी इलाके में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 तक सामने आई ताजा रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 500 से अधिक बताई जा रही है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार को ग्लेशियर के ढहने के बाद अचानक आई बाढ़ ने नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। कई स्थानों पर राहत दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। �
320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं
इस आपदा ने भारत की चिंता भी बढ़ा दी है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, करीब 320 भारतीय नागरिक अभी भी संपर्क से बाहर हैं। ये आंकड़े राहत एवं खोज अभियान के दौरान लगातार अपडेट किए जा रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि चीनी सीमा की ओर मौजूद कुछ भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं और राहत एजेंसियों के संपर्क में हैं। वहीं, कुछ भारतीयों को सुरक्षित निकालकर वापस लाने की कार्रवाई भी जारी है। �
21 भारतीय सुरक्षित दिल्ली पहुंचे
राहत अभियान के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से बचाए गए 21 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंच चुके हैं। इसके अलावा अन्य भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने और उनके परिवारों से संपर्क स्थापित करने के प्रयास जारी हैं। �
कैलाश मानसरोवर यात्रियों को लेकर चिंता
सीमावर्ती क्षेत्र में आई इस आपदा से कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग से जुड़े यात्रियों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है। कई परिवार अपने परिजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और उनके बारे में जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, प्रभावित लोगों में विदेशी नागरिक और धार्मिक यात्रा पर गए लोग भी शामिल हैं। भारत सरकार और संबंधित देशों की एजेंसियां लापता नागरिकों की पहचान और तलाश में जुटी हैं।
बाढ़ के बाद फिर मंडराया नए खतरे का डर
आपदा के बाद एक अन्य बड़ी चिंता यह रही कि प्रभावित हिमालयी क्षेत्र में पानी और मलबे से बनी या प्रभावित झीलों के कारण दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। इसी जोखिम के कारण कुछ समय के लिए बचाव कार्य प्रभावित हुआ, हालांकि स्थिति का आकलन करने के बाद राहत एवं बचाव अभियान फिर तेज किया गया। �
हेलीकॉप्टरों और राहत टीमों से जारी है बचाव अभियान
नेपाल और चीन के प्रभावित इलाकों में राहतकर्मी हेलीकॉप्टरों और अन्य संसाधनों की सहायता से फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र, क्षतिग्रस्त सड़कें और मौसम बचाव अभियान के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि लापता लोगों की तलाश जारी है और मृतकों तथा प्रभावित लोगों की संख्या में बदलाव संभव है। �
भारत ने बढ़ाई मदद
भारत सरकार ने नेपाल को मानवीय सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। राहत सामग्री के साथ तकनीकी और चिकित्सा सहायता की भी तैयारी की गई है। भारतीय एजेंसियां नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर रही हैं।
भारत ने जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बचाव और आपदा प्रबंधन सहायता उपलब्ध कराने की भी बात कही है। �
लगातार बदल रही है स्थिति
नेपाल-तिब्बत सीमा पर हुई यह आपदा हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक जोखिमों की गंभीरता को एक बार फिर सामने लेकर आई है। राहत कार्य जारी होने के कारण मृतकों, लापता लोगों और बचाए गए नागरिकों के आंकड़े लगातार बदल रहे हैं।
BINDAS BOL अपने पाठकों तक इस बड़ी अंतरराष्ट्रीय आपदा से जुड़ी हर महत्वपूर्ण और सत्यापित जानकारी पहुंचाता रहेगा।
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