Kanpur-Lucknow Expressway: उद्घाटन के 26 दिन बाद ही सड़क में दरारें, पैचवर्क पर पैचवर्क से उठे सवाल

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर संचालन शुरू होने के महज 26 दिन बाद सड़क धंसने, उखड़ने और बार-बार पैचवर्क किए जाने की शिकायतों ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 45 किलोमीटर के ग्रीनफील्ड हिस्से में कई स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई है। एनएचएआई की इंजीनियरिंग टीम ने सड़क और मिट्टी के नमूने लेकर जांच शुरू की है, जिसकी रिपोर्ट 17 अगस्त तक आने की संभावना बताई गई है। वहीं कुछ स्थानों पर किए गए पैचवर्क के दोबारा उखड़ने से भी सवाल उठ रहे हैं।

Aug 9, 2026 - 10:46
Aug 11, 2026 - 15:41
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Kanpur-Lucknow Expressway: उद्घाटन के 26 दिन बाद ही सड़क में दरारें, पैचवर्क पर पैचवर्क से उठे सवाल
Kanpur-Lucknow Expressway: उद्घाटन के 26 दिन बाद ही सड़क में दरारें, पैचवर्क पर पैचवर्क से उठे सवाल

Kanpur-Lucknow Expressway: 26 दिन में सड़क धंसी और पैचवर्क भी

 उखड़ा, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

उन्नाव। ब्यूरो, बिंदास बोल न्यूज़ विशेष संवाददाता लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर संचालन शुरू हुए अभी महज 26 दिन हुए हैं, लेकिन सड़क के कई हिस्सों में धंसने, उखड़ने और बार-बार पैचवर्क किए जाने की शिकायतों ने निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रीनफील्ड हिस्से के करीब 45 किलोमीटर मार्ग पर अलग-अलग स्थानों पर सड़क में खामियां सामने आने की बात कही जा रही है। कई जगह सड़क धंसने के बाद पैचवर्क किया गया, लेकिन कुछ स्थानों पर नया पैचवर्क भी दोबारा क्षतिग्रस्त हो गया।

26 जुलाई से सामने आने लगीं खामियां

एक्सप्रेसवे पर वाहनों का संचालन 14 जुलाई से शुरू हुआ था। इसके करीब 12 दिन बाद 26 जुलाई को पहली बार सड़क धंसने की समस्या सामने आई। इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर सड़क के टूटने, उखड़ने और धंसने की शिकायतें सामने आती रहीं।

बताया जा रहा है कि अब तक करीब 20 बड़ी खामियां सामने आ चुकी हैं, जबकि दोनों लेन में दर्जनों स्थानों पर पैचवर्क किया जा चुका है।

पैचवर्क पर भी उठ रहे सवाल

सबसे गंभीर सवाल पैचवर्क की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे हैं। लखनऊ से उन्नाव लेन पर किलोमीटर 63.9 के आसपास एक स्थान पर सड़क धंसने के बाद पैचवर्क किया गया। इसके बाद पैचवर्क दोबारा क्षतिग्रस्त हुआ और फिर मरम्मत करनी पड़ी।

लगातार पैचिंग के बावजूद सड़क के दोबारा उखड़ने से स्थानीय स्तर पर निर्माण और मरम्मत की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कुछ स्थानों पर पैचवर्क से निकले डामर के टुकड़े आसानी से टूटने की बात भी सामने आई है।

एनएचएआई की टीम ने शुरू की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए एनएचएआई की इंजीनियरिंग टीम ने एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया। टीम ने सड़क और मिट्टी के नमूने लिए हैं।

जानकारी के अनुसार कुल 72 नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। इंजीनियरिंग टीम की रिपोर्ट 17 अगस्त तक आने की संभावना बताई गई है। रिपोर्ट के बाद ही सड़क में आई खामियों के वास्तविक कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

ड्रेनेज सिस्टम पर भी सवाल

जांच में शामिल इंजीनियरों की ओर से एक्सप्रेसवे के ड्रेनेज सिस्टम में संभावित समस्या की बात सामने आने की जानकारी है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

बारिश के दौरान सड़क के नीचे पानी जाने या जल निकासी की समस्या होने पर सड़क की मजबूती प्रभावित हो सकती है। ऐसे में ड्रेनेज व्यवस्था की तकनीकी जांच को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

टोल बंद होने के बाद बढ़ा ट्रैफिक

5 अगस्त से एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली बंद होने के बाद वाहनों की संख्या बढ़ने की बात सामने आई है। एक्सप्रेसवे प्रबंधन के अनुसार बड़ी संख्या में वाहन अब इस मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं।

टोल वसूली बंद होने से एक्सप्रेसवे प्रबंधन को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व नुकसान का दावा भी किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर लखनऊ-कानपुर हाईवे पर वाहनों की संख्या में कमी आने की बात सामने आई है।

जगह-जगह सड़क की हालत खराब

एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग स्थानों पर सड़क धंसने और उखड़ने की शिकायतें सामने आई हैं। बेगमपुर, बेगमखेड़ा, सोहरामऊ, आनंदी वाटर पार्क, इजरायलखेड़ा, अड़ेरुवा, बड़ौरा, दुवा और भवानीखेड़ा समेत कई स्थानों पर सड़क में खामियां सामने आने की जानकारी दी गई है।

कुछ स्थानों पर सड़क धंसने के बाद नई पैचिंग की गई, जबकि कुछ जगहों पर पुराना पैचवर्क भी क्षतिग्रस्त हो गया।

यातायात सुरक्षा पर भी सवाल

सड़क की गुणवत्ता के साथ एक्सप्रेसवे पर यातायात सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर ग्रामीणों के सड़क पर आने-जाने और आवारा पशुओं के मार्ग पर दिखाई देने की शिकायतें सामने आई हैं।

ऐसे में तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पर लोगों और पशुओं की मौजूदगी दुर्घटना का खतरा बढ़ा सकती है। एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी संबंधित एजेंसियों से प्रभावी निगरानी की उम्मीद की जा रही है।

अल्युमिनियम गार्ड का प्लास्टर भी क्षतिग्रस्त

उन्नाव-लखनऊ लेन पर शंभूखेड़ा गांव के पास सड़क किनारे लगे अल्युमिनियम गार्ड के नीचे का प्लास्टर क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि करीब 20 मीटर हिस्से में गार्ड के नीचे का प्लास्टर टूटकर बिखर गया है।

यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं की गई तो सुरक्षा गार्ड के नीचे गिरने की आशंका जताई जा रही है, जिससे सड़क पर चलने वाले वाहनों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

अब जांच रिपोर्ट का इंतजार

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर इतनी कम अवधि में सड़क में आई खामियों ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि सड़क की वास्तविक समस्या और उसके कारणों का पता एनएचएआई की जांच रिपोर्ट के बाद ही चलेगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सड़क धंसने और बार-बार पैचवर्क की वजह निर्माण गुणवत्ता है, ड्रेनेज की समस्या है या किसी अन्य तकनीकी कारण से सड़क प्रभावित हो रही है?

एनएचएआई की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।

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