कानपुर में जर्जर धर्मशाला पर कब्जे का आरोप, ट्रस्ट ने जिलाधिकारी से लगाई गुहार
कानपुर के रामबाग स्थित श्री स्वामी लीला शाह मेमोरियल ट्रस्ट के भवन को लेकर विवाद सामने आया है। ट्रस्ट ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में भवन के एक कमरे पर कथित कब्जे का आरोप लगाते हुए उसे खाली कराने की मांग की है। ट्रस्ट का कहना है कि भवन जर्जर घोषित किया जा चुका है और इसके कारण आसपास की इमारतों को भी खतरा बना हुआ है।
कानपुर। रामबाग स्थित श्री स्वामी लीला शाह मेमोरियल ट्रस्ट के एक भवन को लेकर विवाद सामने आया है। ट्रस्ट की ओर से जिलाधिकारी, कानपुर नगर को प्रार्थना पत्र देकर भवन के एक कमरे को कथित रूप से कब्जे से मुक्त कराने और जर्जर भवन के पुनर्निर्माण में सहयोग की मांग की गई है।
प्रार्थना पत्र के अनुसार ट्रस्ट का भवन 104ए/375, रामबाग, कानपुर नगर में स्थित है। पत्र में बताया गया है कि यह भवन धर्मशाला के रूप में गरीब और असहाय लोगों को मांगलिक कार्यों के लिए उपलब्ध कराया जाता था। भवन के बाहरी हिस्से के एक कमरे में स्वर्गीय भुवनदास गोदवानी को कुछ समय के लिए केयरटेकर के रूप में रहने की अनुमति दी गई थी।
ट्रस्ट का आरोप है कि भुवनदास गोदवानी के निधन के बाद उनके पुत्र आरके गोदवानी, शशांक गोदवानी और श्रेयांश गोदवानी ने उक्त कमरे पर कब्जा कर लिया। प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि ट्रस्ट पदाधिकारियों द्वारा कमरा खाली करने के लिए कहे जाने पर आरके गोदवानी ने स्वस्थ होने के बाद कमरा वापस करने की बात कही थी, लेकिन इसके बाद कमरा खाली नहीं हुआ।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि भवन के दोनों मुख्य द्वारों के बीच जबरन दो चार पहिया वाहन खड़े किए जा रहे हैं। ट्रस्ट ने भवन की स्थिति को बेहद जर्जर बताते हुए कहा है कि इससे आसपास की इमारतों पर भी असर पड़ रहा है और ट्रस्ट के सदस्यों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है।
प्रार्थना पत्र में ट्रस्ट ने दावा किया है कि 7 अगस्त 2023 को कानपुर नगर निगम द्वारा भवन को पूर्णतः जर्जर घोषित करते हुए शशांक गोदवानी और श्रेयांश गोदवानी को नोटिस दिया गया था। ट्रस्ट के मुताबिक भवन का जीर्णोद्धार नहीं हो पाने के कारण पिछले कई वर्षों से गरीब एवं असहाय लोगों के मांगलिक कार्यों के लिए इसका उपयोग नहीं किया जा पा रहा है।
ट्रस्ट ने जिलाधिकारी को यह भी अवगत कराया है कि यदि भवन को खाली कराए बिना निर्माण या पुनर्निर्माण का कार्य कराया गया तो जर्जर भवन के तत्काल गिरने की आशंका है। ट्रस्ट ने ऐसी स्थिति में होने वाली किसी भी दुर्घटना की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है।
ट्स्ट ने जिलाधिकारी से मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करते हुए शशांक गोदवानी और श्रेयांश गोदवानी से भवन खाली कराने की मांग की है, ताकि भवन का पुनर्निर्माण कराया जा सके और गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के मांगलिक कार्यों के लिए धर्मशाला का फिर से उपयोग हो सके।
नोट: भवन पर कब्जे, जर्जर स्थिति और अन्य आरोप प्रार्थना पत्र में लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित पक्ष का पक्ष इस दस्तावेज में उपलब्ध नहीं है।
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