शाहजहांपुर में सर्राफ से दो लाख की वसूली का मामला: चार सिपाही निलंबित, दो गिरफ्तार; सेवा समाप्ति पर उठे सवाल

शाहजहांपुर में सर्राफा व्यापारी को मादक पदार्थ के झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर दो लाख रुपये की कथित वसूली के मामले में तिलहर थाने के चार सिपाहियों पर कार्रवाई हुई है। चारों को निलंबित किया गया है, जबकि दो सिपाही गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। फरार दो सिपाहियों की तलाश जारी है। मामले में कड़ी विभागीय कार्रवाई और सेवा समाप्ति की संभावना को लेकर चर्चा तेज है।

Sep 11, 2026 - 13:55
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शाहजहांपुर में सर्राफ से दो लाख की वसूली का मामला: चार सिपाही निलंबित, दो गिरफ्तार; सेवा समाप्ति पर उठे सवाल

शाहजहांपुर। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में सर्राफा व्यापारी से दो लाख रुपये की कथित वसूली के मामले में तिलहर थाने के चार सिपाहियों पर कार्रवाई हुई है। मामले की जांच के बाद चारों सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें से दो सिपाहियों पंकज और वीरेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि अरुण चित्तौड़िया और तुषार की तलाश की जा रही है।

आरोप है कि चारों सिपाहियों ने सर्राफा व्यापारी को मादक पदार्थ के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी थी। आरोप के मुताबिक व्यापारी को रोककर उसकी तलाशी ली गई और उसकी बाइक में मादक पदार्थ रखकर मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। इसके बाद उसके परिवार से दो लाख रुपये की कथित वसूली की गई।

मामला सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने इसकी जांच कराई। जांच के आधार पर तिलहर थाने में तैनात सिपाही अरुण चित्तौड़िया, पंकज, तुषार और वीरेंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद चारों को निलंबित कर दिया गया और पंकज तथा वीरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के अनुसार फरार सिपाही अरुण चित्तौड़िया और तुषार की तलाश के लिए पुलिस टीमें लगाई गई हैं। दोनों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस उनकी लोकेशन के आधार पर भी तलाश कर रही है।

मामले की विवेचना में सर्राफा व्यापारी और उसके पिता के बीच हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर शामिल किया जा सकता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

क्या सेवा समाप्ति बनेगी सख्त संदेश?

इस मामले ने पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए हैं। यदि विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं और नियमानुसार दोष सिद्ध होता है, तो सेवा समाप्ति जैसी कठोर कार्रवाई दूसरे कर्मचारियों के लिए भी सख्त संदेश साबित हो सकती है।

हालांकि, फिलहाल चारों सिपाहियों की सेवा समाप्त होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे संभावित विभागीय कार्रवाई के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अंतिम फैसला विभागीय जांच और लागू सेवा नियमों के आधार पर होगा।

मामले में पुलिस की कार्रवाई से यह संदेश जरूर गया है कि वर्दी का दुरुपयोग कर किसी नागरिक को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देना या अवैध वसूली करना गंभीर मामला है। अब निगाह इस बात पर है कि जांच पूरी होने के बाद विभाग आरोपों में घिरे पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या अंतिम कार्रवाई करता है।

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