कानपुर: सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर NSUI ने किया माल्यार्पण, कार्तिकेय सिंह बोले- सरदार कांग्रेस के थे, कांग्रेस के हैं
कानपुर में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर NSUI कानपुर ग्रामीण ने यशोदा नगर बाईपास स्थित सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का नेतृत्व NSUI जिला उपाध्यक्ष कार्तिकेय सिंह ने किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने "सरदार पटेल अमर रहें" और "कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद" के नारे लगाए। कार्तिकेय सिंह ने कहा कि सरदार पटेल आजीवन कांग्रेस के सिपाही रहे, वे कांग्रेस के अध्यक्ष बने, बारडोली सत्याग्रह से उन्हें सरदार की उपाधि मिली और आजादी के बाद पहले गृहमंत्री के रूप में 562 से ज्यादा रियासतों को भारत में मिलाकर अखंड भारत का निर्माण किया। उन्होंने कहा कि आज कुछ लोग सरदार पटेल के नाम पर राजनीति कर रहे हैं, जबकि इतिहास गवाह है कि गांधी जी की हत्या के बाद सरदार पटेल ने ही RSS पर प्रतिबंध लगाया था। सरदार पटेल कांग्रेस के थे और हमेशा कांग्रेस के रहेंगे। NSUI कार्यकर्ताओं ने देश की एकता और अखंडता की रक्षा का संकल्प लिया।
कानपुर। लौह पुरुष भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार को NSUI कानपुर ग्रामीण इकाई द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यशोदा नगर बाईपास स्थित सरदार पटेल की प्रतिमा पर NSUI कार्यकर्ताओं ने माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का नेतृत्व NSUI जिला उपाध्यक्ष कार्तिकेय सिंह ने किया। इस दौरान NSUI कार्यकर्ताओं ने "जब तक सूरज चांद रहेगा, सरदार पटेल तेरा नाम रहेगा" और "कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद" के गगनभेदी नारे लगाए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला उपाध्यक्ष कार्तिकेय सिंह ने कहा, "सरदार वल्लभभाई पटेल जीवनभर कांग्रेस के सच्चे सिपाही रहे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने। 1928 में बारडोली सत्याग्रह का सफल नेतृत्व करने पर महिलाओं ने उन्हें 'सरदार' की उपाधि दी। आजादी के बाद देश के पहले उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के रूप में उन्होंने 562 से अधिक रियासतों का भारत में विलय कराकर जिस अखंड भारत का निर्माण किया, वह इतिहास में अमर है। महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ मिलकर उन्होंने जो आधुनिक भारत बनाया, उसे तोड़ने और हड़पने वाली ताकतों से हम हर मोर्चे पर लड़ेंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "आज देश में कुछ लोग सरदार पटेल के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और उनकी विरासत पर दावा ठोक रहे हैं, लेकिन इतिहास इस बात का गवाह है कि महात्मा गांधी जी की हत्या के बाद लौह पुरुष सरदार पटेल ने ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाया था। जो विचारधारा सरदार पटेल के लिए अस्वीकार्य थी, वही आज उनकी विरासत को हड़पने का प्रयास कर रही है। सच्चाई यह है कि सरदार पटेल कांग्रेस के थे, कांग्रेस के हैं और हमेशा कांग्रेस के रहेंगे।"
इस अवसर पर सरदार पटेल के अखंड भारत के संकल्प को आत्मसात करते हुए NSUI कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि देश की एकता और अखंडता को हानि पहुँचाने वाले तत्वों के खिलाफ उनकी आवाज और संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वे सरदार पटेल के आदर्शों - एकता, अखंडता और लौह संकल्प को सदैव अपने हृदय में संजोए रखेंगे और उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए छात्रों और युवाओं के हक़ की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ते रहेंगे।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रथमेश, वंश मिश्रा, शुभांकित, हर्ष नारायण कश्यप सहित बड़ी संख्या में NSUI कार्यकर्ता और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

