व्यापारी वोट से बनेगी यूपी में सरकार, 2027 में निर्णायक भूमिका निभाएगा व्यापारी वर्ग: अनूप शुक्ला
Summary: कानपुर में प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के प्रादेशिक व्यापारी महासम्मेलन में व्यापारियों की राजनीतिक भागीदारी, सुरक्षा, जीएसटी की जटिलताओं, मंडी शुल्क, ऑनलाइन कारोबार और ऋण जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनूप शुक्ला ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में व्यापारी वर्ग निर्णायक भूमिका निभाएगा। Description: कानपुर के सिविल लाइंस स्थित मर्चेंट चेंबर में आयोजित प्रादेशिक व्यापारी महासम्मेलन में प्रदेशभर के व्यापारी नेताओं ने व्यापारियों के उत्पीड़न, राजनीतिक हिस्सेदारी, व्यापारी सुरक्षा आयोग, जीएसटी सुधार, मंडी शुल्क समाप्त करने, छोटे व्यापारियों को ऑनलाइन कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के लिए सहायता तथा युवाओं को उद्योग के लिए ऋण उपलब्ध कराने सहित कई मांगें उठाईं। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनूप शुक्ला ने कहा कि व्यापारी किसी एक राजनीतिक दल से बंधा नहीं है और जो दल व्यापारियों को सम्मान तथा उचित राजनीतिक हिस्सेदारी देगा, व्यापारी उसके साथ खड़ा होगा।
कानपुर। प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश की ओर से रविवार को कानपुर के सिविल लाइंस स्थित मर्चेंट चेंबर में प्रादेशिक व्यापारी महासम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पहुंचे व्यापारी नेताओं ने व्यापारियों की सुरक्षा, राजनीतिक भागीदारी, जीएसटी की जटिलताओं, मंडी शुल्क, ऑनलाइन कारोबार और रोजगार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
सम्मेलन में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनूप शुक्ला मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। व्यापारियों ने उनका माला पहनाकर, प्रतीक चिह्न, अंगवस्त्र और स्वर्ण मुकुट भेंट कर स्वागत किया।
2027 में व्यापारी तय करेगा राजनीतिक दिशा
डॉ. अनूप शुक्ला ने कहा कि व्यापारी वर्ग अब अपने अधिकारों को लेकर चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि व्यापारी आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ चुनावी राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका रखता है।
उन्होंने कहा, “व्यापारी किसी एक राजनीतिक दल से बंधा हुआ नहीं है। जो राजनीतिक दल व्यापारियों को उचित राजनीतिक हिस्सेदारी, सम्मान और सुरक्षा देगा, व्यापारी उसके साथ खड़ा होगा।”
शुक्ला ने दावा किया कि प्रदेश में व्यापारी वर्ग की आबादी करीब 30 प्रतिशत है और व्यापारियों का वोट आगामी विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में व्यापारी अपने मत प्रतिशत को बढ़ाकर सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभाने की कोशिश करेगा।
व्यापारियों की राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा संगठन पहले भी उठाता रहा है। जनवरी 2026 में कानपुर में आयोजित व्यापारी महासम्मेलन से पहले शुक्ला ने जीएसटी पंजीकृत व्यापारियों के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग उठाई थी और शिक्षक एवं स्नातक एमएलसी चुनाव की तर्ज पर जीएसटी पंजीकृत व्यापारियों के लिए प्रतिनिधित्व की व्यवस्था का सुझाव दिया था।
“नोट और वोट देने के बाद भी उपेक्षा”
व्यापारी महासम्मेलन के संबंध में जनवरी 2026 की रिपोर्ट में भी अनूप शुक्ला ने व्यापारियों की राजनीतिक उपेक्षा का मुद्दा उठाया था। उस समय उन्होंने कहा था कि व्यापारी समाज को राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं मिल रही है।
सम्मेलन में इसी मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए व्यापारियों ने कहा कि चुनाव के दौरान राजनीतिक दल व्यापारियों से समर्थन मांगते हैं, लेकिन राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में उनकी अपेक्षित भागीदारी सुनिश्चित नहीं होती।
अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप
महासम्मेलन में व्यापारियों ने पुलिस, जीएसटी, खाद्य विभाग, नगर निगम और अन्य विभागों के अधिकारियों पर चेकिंग तथा कार्रवाई के नाम पर उत्पीड़न किए जाने का आरोप लगाया।
व्यापारी नेताओं ने कहा कि शिकायतों के समय पर निस्तारण की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए। उनकी प्रमुख मांग रही कि प्रदेश के सभी थानों में अलग से व्यापारी सेल गठित किया जाए, जहां व्यापारियों से संबंधित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण हो।
महासम्मेलन से पहले भी अनूप शुक्ला ने सरकारी विभागों द्वारा व्यापारियों के कथित उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई थी। सितंबर में सम्मेलन की तैयारियों को लेकर हुई बैठक में उन्होंने कहा था कि सरकारी विभागों के अधिकारियों द्वारा व्यापारियों का उत्पीड़न अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।
व्यापारी सुरक्षा आयोग की मांग
सम्मेलन में व्यापारियों की सबसे प्रमुख मांगों में व्यापारी सुरक्षा आयोग के गठन को शामिल किया गया। सम्मेलन से पहले जारी तैयारियों संबंधी रिपोर्टों में भी सुरक्षा आयोग, व्यापारियों के लिए राजनीतिक एवं सामाजिक हिस्सेदारी, मंडी शुल्क समाप्त करने और उद्योग के लिए ऋण सीमा बढ़ाने जैसे मुद्दों को प्रमुख बताया गया था।
अनूप शुक्ला इससे पहले भी व्यापारी सुरक्षा आयोग की मांग उठा चुके हैं। 2025 में प्रयागराज में उन्होंने व्यापारियों के कथित उत्पीड़न और वसूली के आरोप लगाते हुए सुरक्षा आयोग के गठन तथा मंडी शुल्क समाप्त करने की मांग की थी।
युवाओं और छोटे व्यापारियों के लिए पैकेज की मांग
महासम्मेलन में स्टार्टअप और स्वरोजगार योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग भी उठी। व्यापारियों का कहना था कि सरकारी योजनाओं की घोषणा के बावजूद युवाओं को उसका अपेक्षित लाभ जमीन पर नहीं मिल पा रहा है।
संगठन ने युवाओं को उद्योग स्थापित करने के लिए 25 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण, शिक्षित युवाओं को निशुल्क विशेष प्रशिक्षण और नए उद्योगों को सस्ती दरों पर भूमि उपलब्ध कराने की मांग रखी।
सितंबर की शुरुआत में सम्मेलन की तैयारियों के दौरान संगठन की ओर से उद्योग लगाने के लिए ऋण सीमा को पांच लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की मांग भी सामने आई थी।
ऑनलाइन कारोबार से छोटे व्यापारियों की चुनौती
व्यापारी नेताओं ने ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि बड़ी ऑनलाइन कंपनियों से प्रतिस्पर्धा में छोटे और मध्यम दुकानदारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बृजेंद्र गुप्ता ने इससे पहले कहा था कि ऑनलाइन खरीदारी का असर छोटे व्यापारियों के कारोबार पर पड़ रहा है और छोटे दुकानदारों के हितों की रक्षा के लिए सरकार को प्रभावी योजना बनानी चाहिए।
महासम्मेलन में उठीं 20 प्रमुख मांगें
व्यापारी नेताओं ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—
1. व्यापारी सुरक्षा आयोग का गठन किया जाए।
2. व्यापारियों को राजनीतिक हिस्सेदारी दी जाए।
3. ऑनलाइन शॉपिंग के लिए ऐसी नीति बनाई जाए जिससे छोटे और मध्यम व्यापारियों को प्रतिस्पर्धा में राहत मिले।
4. युवाओं को उद्योग स्थापित करने के लिए 25 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाए।
5. शिक्षित युवाओं को निशुल्क विशेष ट्रेनिंग और प्रशिक्षण दिया जाए।
6. अतिक्रमण के नाम पर हटाए गए छोटे व्यापारियों को दुकानें उपलब्ध कराई जाएं।
7. महिला उद्यमियों को जीएसटी में विशेष छूट दी जाए।
8. मंडी शुल्क समाप्त किया जाए।
9. सरकारी समितियों में व्यापारियों को शामिल किया जाए।
10. व्यापारियों के लिए पेंशन योजना लागू की जाए।
11. सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से व्यापारिक समस्याओं का समाधान किया जाए।
12. छोटे और मध्यम व्यापारियों को कम ब्याज दर पर बैंक ऋण दिया जाए।
13. जीएसटी की जटिलताओं को दूर किया जाए।
14. प्रदेश के सभी थानों में व्यापारी सेल बनाया जाए।
15. व्यापारियों को सस्ता लाइसेंस उपलब्ध कराया जाए।
16. ब्रांडेड गल्ले को टैक्स फ्री किए जाने पर विचार किया जाए।
17. डीजल-पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए।
18. जीएसटी और खाद्य विभाग की चेकिंग के नाम पर कथित उत्पीड़न रोका जाए।
19. उद्योग एवं व्यापार से संबंधित बैठकों में व्यापारियों की समस्याओं का तत्काल निस्तारण किया जाए।
20. नए उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सस्ती दरों पर भूमि आवंटित की जाए।
पदाधिकारियों ने संभाली जिम्मेदारी
सम्मेलन की अध्यक्षता प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बृजेंद्र गुप्ता ने की। संचालन जिला अध्यक्ष लखनऊ राहुल गुप्ता ने किया, जबकि स्वागत भाषण कानपुर जिला अध्यक्ष जेपी यादव ने दिया।
सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में व्यापारी नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। इससे पहले संगठन ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनसंपर्क अभियान चलाकर व्यापारियों की समस्याएं और सम्मेलन की प्रमुख मांगें जुटाई थीं।
व्यापारी संगठनों की ओर से उठाए गए इन मुद्दों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल व्यापारियों की मांगों को अपने एजेंडे में किस हद तक शामिल करते हैं। सम्मेलन में व्यापारी नेतृत्व ने संकेत दिया कि इस बार वह केवल आश्वासनों तक सीमित रहने के बजाय राजनीतिक भागीदारी और नीतिगत मुद्दों पर स्पष्ट रुख चाहता है।
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