कानपुर में भूमि विवाद को लेकर 73 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक ने मुख्यमंत्री से लगाई सुरक्षा की गुहार, भू-माफियाओं पर धमकी व कब्जे में बाधा का आरोप
कानपुर नगर के नर्वल तहसील क्षेत्र में भूमि विवाद को लेकर 73 वर्षीय सतीश चन्द्र दीक्षित और उनके छोटे भाई कुलदीप दीक्षित ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप एवं परिवार की सुरक्षा की मांग की है। प्रार्थीगण का आरोप है कि उनकी पैतृक भूमि पर कुछ लोगों द्वारा लंबे समय से अवैधानिक रूप से हस्तक्षेप किया जा रहा है तथा उन्हें खेती-बुआई और शांतिपूर्ण कब्जे में बाधा पहुंचाई जाती है। प्रार्थीगण ने गाली-गलौज, विवाद और जान से मारने की धमकी दिए जाने के आरोप भी लगाए हैं। दिए गए प्रार्थना-पत्र के अनुसार, भूमि से संबंधित राजस्व एवं चकबंदी न्यायालयों में कई वैधानिक कार्यवाहियां चल चुकी हैं। प्रार्थीगण का दावा है कि तहसीलदार, उप जिलाधिकारी तथा आयुक्त स्तर पर हुई विभिन्न कार्यवाहियों में उनके पक्ष से संबंधित आदेश पारित हुए हैं और दिनांक 09 अक्टूबर 2026 को अतिरिक्त आयुक्त न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश एवं निगरानी को निरस्त किया गया। प्रार्थीगण ने मुख्यमंत्री से मामले का संज्ञान लेकर वरिष्ठ नागरिकों एवं उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कराने तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है।
कानपुर। कानपुर नगर के नर्वल तहसील क्षेत्र में पैतृक भूमि को लेकर चल रहे लंबे समय से विवाद के मामले में 73 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक सतीश चन्द्र दीक्षित और उनके छोटे भाई कुलदीप दीक्षित ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मामले का संज्ञान लेकर सुरक्षा एवं आवश्यक वैधानिक कार्रवाई कराने की मांग की है।
कानपुर में भूमि विवाद को लेकर 73 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक ने मुख्यमंत्री से लगाई सुरक्षा की गुहार, भू-माफियाओं पर धमकी व कब्जे में बाधा का आरोप
प्रार्थीगण द्वारा मुख्यमंत्री को दिए गए प्रार्थना-पत्र के अनुसार, उनका तथा उनके परिजनों का मौजा पुरवा एवं मौजा सिकठिया क्षेत्र में स्थित कुछ कृषि भूमि पर स्वामित्व एवं कब्जे का दावा है। प्रार्थीगण का कहना है कि उक्त भूमि को लेकर विभिन्न राजस्व एवं चकबंदी न्यायालयों में वैधानिक कार्यवाहियां चलती रही हैं।
📌 नाम हटाकर दूसरे नाम दर्ज कराने का आरोप
प्रार्थीगण ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2014 में राजस्व कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से उनके पिता एवं अन्य संबंधित परिजनों के नाम राजस्व अभिलेखों से हटाकर कुछ अन्य लोगों के नाम दर्ज करा दिए गए। प्रार्थीगण ने इसे विधि-विरुद्ध बताते हुए संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
प्रार्थना-पत्र में यह भी कहा गया है कि मौजा सिकठिया की भूमि से संबंधित मामला चकबंदी न्यायालय, नर्वल में धारा 9-क के अंतर्गत विचाराधीन है।
📍राजस्व न्यायालयों में हुई कई कार्यवाहियां
प्रार्थीगण के अनुसार, अप्रैल 2024 के आसपास उन्होंने उप जिलाधिकारी (न्यायिक), नर्वल के न्यायालय में धारा 116 के अंतर्गत वाद दाखिल किया था। उनके अनुसार, न्यायालय द्वारा 21 सितंबर 2024 को प्राथमिक आदेश पारित करते हुए लेखपाल से रिपोर्ट मांगी गई थी। लेखपाल द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद संबंधित पक्षों से आपत्तियां मांगी गईं।
प्रार्थीगण का दावा है कि संबंधित विपक्षी पक्ष द्वारा लंबे समय तक आपत्तियां दाखिल नहीं की गईं और विभिन्न तिथियों पर स्थगन लिया जाता रहा।
इसी क्रम में प्रार्थीगण के अनुसार, पुरवामीर स्थित भूमि के संबंध में तहसीलदार नर्वल द्वारा 15 अक्टूबर 2023 तथा 6 फरवरी 2024 को आदेश पारित किए गए थे। प्रार्थीगण का कहना है कि इन आदेशों को चुनौती देने के लिए बाद में रिस्टोरेशन प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया, जिसे संबंधित पक्ष ने 13 फरवरी 2025 को वापस ले लिया।
इसके बाद प्रार्थीगण के अनुसार मामला आयुक्त कानपुर मंडल के समक्ष भी पहुंचा। प्रार्थना-पत्र में दावा किया गया है कि पूर्व में प्राप्त स्थगन आदेश को चुनौती दिए जाने के बाद अतिरिक्त आयुक्त के न्यायालय द्वारा संबंधित निगरानी को पोषणीय न मानते हुए निरस्त किया गया और वैधानिक रूप से सक्षम न्यायालय में अपील दाखिल करने का रास्ता बताया गया।
📌 एसडीएम न्यायालय में अपील भी निरस्त होने का दावा
प्रार्थीगण के अनुसार, इसके बाद उप जिलाधिकारी नर्वल के न्यायालय में अपील दाखिल की गई, जिस पर लगभग छह माह की न्यायिक प्रक्रिया के बाद 21 अप्रैल 2026 को आदेश पारित कर अपील निरस्त कर दी गई।
प्रार्थना-पत्र के अनुसार, इसके बाद लगभग दो माह पश्चात आयुक्त कानपुर मंडल के न्यायालय में पुनः निगरानी दाखिल की गई और 16 जुलाई 2026 को स्थगन आदेश प्राप्त किया गया। प्रार्थीगण ने इस आदेश एवं निगरानी को चुनौती दी।
प्रार्थीगण का दावा है कि लगभग तीन माह की न्यायिक प्रक्रिया के बाद अतिरिक्त आयुक्त न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2026 को उक्त स्थगन आदेश एवं निगरानी को निरस्त कर दिया।
📌 खेती-बुआई में बाधा और धमकी के आरोप
प्रार्थीगण ने मुख्यमंत्री को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि पिछले कई वर्षों से कुछ लोग उनकी भूमि के शांतिपूर्ण कब्जे में लगातार हस्तक्षेप कर रहे हैं। उनके अनुसार, खेत में बुआई एवं जुताई करने में भी बाधा उत्पन्न की जाती है और विरोध करने पर गाली-गलौज एवं विवाद की स्थिति पैदा होती है।
प्रार्थीगण ने यह भी आरोप लगाया है कि मुकदमों को वापस लेने के लिए उन पर दबाव बनाया जाता है तथा उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गई हैं। उनका कहना है कि इस संबंध में समय-समय पर जिलाधिकारी कानपुर, पुलिस आयुक्त कानपुर तथा संबंधित पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना-पत्र दिए गए हैं।
📍अन्य मुकदमों का भी किया गया उल्लेख
प्रार्थना-पत्र में प्रार्थीगण ने कुछ संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध न्यायालयों में लंबित अन्य मुकदमों का भी उल्लेख किया है। इनमें अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन-द्वितीय, कानपुर नगर के न्यायालय में धारा 420 एवं 120-बी के अंतर्गत विचाराधीन मुकदमे का उल्लेख है।
इसके अलावा प्रार्थना-पत्र में मुकदमा संख्या 443/2025 के संबंध में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191(2) एवं 352 के तहत न्यायालय में मामला विचाराधीन होने की बात कही गई है।
इन मामलों में आरोपों की अंतिम न्यायिक पुष्टि होना संबंधित न्यायालयों के निर्णय पर निर्भर करेगा।
📌 वरिष्ठ नागरिकों ने मुख्यमंत्री से मांगी सुरक्षा
प्रार्थीगण ने बताया कि वे वरिष्ठ नागरिक हैं और लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद के कारण उन्हें तथा उनके परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि विवाद के चलते भविष्य में जान-माल को खतरा उत्पन्न हो सकता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे प्रकरण का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को मामले के तथ्यों एवं न्यायालयों में पारित आदेशों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई करने तथा उनके एवं परिवार के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की है।
प्रार्थीगण का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी संपत्ति पर शांतिपूर्ण एवं वैधानिक अधिकार की रक्षा करना और बिना किसी भय के वरिष्ठ नागरिक के रूप में जीवन व्यतीत करना है।

