कानपुर नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में हंगामा, वकीलों को बैठाने पर नगर आयुक्त नाराज; 15 मिनट में बैठक खत्म
कानपुर नगर निगम की कार्यकारिणी समिति की बैठक बुधवार को महापौर प्रमिला पांडेय के साथ दो अधिवक्ताओं के बैठने को लेकर विवाद के बाद समाप्त हो गई। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बैठक में बाहरी अधिवक्ताओं की मौजूदगी पर आपत्ति जताई और अधिकारियों के साथ बाहर चले गए। महापौर ने मामले को शासन और डीओपीटी तक ले जाने की बात कही।
कानपुर नगर निगम की बैठक में टकराव, महापौर के साथ वकील पहुंचे तो नगर
आयुक्त ने किया बहिष्कार
कानपुर। नगर निगम कार्यकारिणी समिति की बैठक बुधवार को महापौर प्रमिला पांडेय और नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के बीच विवाद के बाद महज 15 मिनट में समाप्त हो गई। बैठक में महापौर अपने साथ दो अधिवक्ताओं को लेकर पहुंचीं। नगर आयुक्त ने कार्यकारिणी की बैठक में बाहरी अधिवक्ताओं की मौजूदगी पर आपत्ति जताई और अधिकारियों के साथ बैठक छोड़कर चले गए।
घटना के बाद महापौर ने कहा कि अब वह चुप नहीं बैठेंगी और पूरे मामले को शासन तक ले जाएंगी। उन्होंने संबंधित दस्तावेज डायरेक्टरेट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) को भी भेजने की बात कही।
अधिवक्ताओं की मौजूदगी पर शुरू हुआ विवाद
बुधवार को दोपहर करीब सवा दो बजे कार्यकारिणी समिति की बैठक शुरू हुई। महापौर प्रमिला पांडेय अपने साथ अधिवक्ता मो. जावेद और रिषभ अवस्थी को लेकर पहुंचीं। दोनों अधिवक्ता समिति कक्ष में महापौर के पास बैठ गए।
इस पर नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने नाराजगी जताई। महापौर ने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर कानूनी राय लेने के लिए अधिवक्ताओं को साथ लाया गया है, क्योंकि उन्हें सभी कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी नहीं है।
नगर आयुक्त ने बैठक में बाहरी व्यक्तियों को बैठाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अधिवक्ताओं को कार्यकारिणी की बैठक में नहीं बैठाया जा सकता।
पार्षदों ने भी उठाया सवाल
विवाद के दौरान कार्यकारिणी के 12 पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब बैठक में नगर निगम के जोनल अधिकारी और अन्य अधिकारी मौजूद रह सकते हैं, तो अधिवक्ताओं की मौजूदगी पर आपत्ति क्यों है।
इस पर नगर आयुक्त ने कहा कि अधिकारी नगर निगम के ही हैं, जबकि अधिवक्ता निगम के अधिकारी नहीं हैं। महापौर ने कहा कि अधिवक्ता रिषभ अवस्थी नगर निगम के पैनल से जुड़े हैं। उन्होंने नगर निगम अधिनियम की धारा 117 का हवाला देते हुए जवाब देने की बात कही।
नगर आयुक्त ने कहा कि वह नियमों के अनुसार ही जवाब देंगे। इसके बाद वह बैठक से उठकर चले गए। उनके पीछे नगर निगम के अन्य अधिकारी भी बाहर निकल गए। महापौर भी बैठक कक्ष से निकलकर अपने कार्यालय में चली गईं। इस घटनाक्रम के बाद बैठक समाप्त हो गई।
महापौर बोलीं—शासन तक पहुंचाऊंगी मामला
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में महापौर प्रमिला पांडेय ने कहा कि अब वह चुप नहीं बैठेंगी। उन्होंने कहा कि उनके पास मामले से जुड़े सभी दस्तावेज हैं और वह उन्हें शासन तक पहुंचाएंगी।
महापौर ने यह भी कहा कि पूरे प्रकरण की जानकारी डायरेक्टरेट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) को दी जाएगी।
एक महीने में चौथी बार नहीं निकला निष्कर्ष
बताया गया कि करीब एक महीने के भीतर नगर निगम कार्यकारिणी समिति की बैठक चौथी बार बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हुई। ताजा घटनाक्रम के बाद नगर निगम के कामकाज और कार्यकारिणी की बैठकों में लिए जाने वाले फैसलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल बैठक में अधिवक्ताओं की मौजूदगी को लेकर शुरू हुआ विवाद नगर निगम प्रशासन और महापौर के बीच मतभेद का नया मुद्दा बन गया है। मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर नजर रहेगी।

