कानपुर में मकान के सामने दुकान को लेकर विवाद, 25 लाख रुपये की कथित अवैध वसूली का आरोप
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कानपुर में मकान के सामने दुकान को लेकर विवाद, 25 लाख रुपये की कथित अवैध वसूली का आरोप
कानपुर। काजीखेड़ा, लाल बंगला क्षेत्र में मकान के सामने स्थित एक दुकान को लेकर विवाद अब पुलिस और प्रशासन तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता सगीर अंजम रजा ने प्रेसवार्ता के माध्यम से कुछ लोगों पर लगातार दबाव बनाने, परिवार को परेशान करने और 25 लाख रुपये की कथित अवैध वसूली मांगने का आरोप लगाया है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उनके मकान के सामने शफीक अहमद अंसारी की एक दुकान थी, जिसे लेकर देशराज सिंह चौहान और उनके पुत्र राजेन्द्र सिंह से न्यायालय में मुकदमा चल रहा था। सगीर अंजम रजा का दावा है कि राजेन्द्र सिंह से संबंधित मुकदमा 16 मार्च 2026 को न्यायालय से खारिज हो गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बाद 9 सितंबर 2026 को शाम करीब चार बजे राजेन्द्र सिंह अपने कुछ साथियों के साथ उनके मकान संख्या 59सी, काजीखेड़ा, लाल बंगला के मुख्य गेट के सामने पहुंचे। उनके अनुसार वहां धरना-प्रदर्शन किया गया और बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
सगीर अंजम रजा का आरोप है कि इस घटना के दौरान उनकी पत्नी की तबीयत बिगड़ गई। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी का हृदय संबंधी उपचार चल रहा है। उनका यह भी दावा है कि घटना से उनके छोटे बच्चे डर गए और परिवार में भय का माहौल बन गया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उनसे 25 लाख रुपये की कथित अवैध वसूली की मांग की गई, जिसे देने में वह असमर्थ हैं। उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं की आशंका को लेकर उन्होंने 5 सितंबर और 9 सितंबर 2026 को कमिश्नर को शिकायत दी थी। इसके बावजूद कथित रूप से उन्हें और उनके परिवार को परेशान किया जाता रहा।
शिकायतकर्ता के अनुसार, शफीक अहमद अंसारी द्वारा दुकान का शटर और टिनशेड हटा लिए जाने के बाद उनके मकान के मुख्य गेट से आवागमन का रास्ता खुल गया था। इसके बाद भी विवाद समाप्त नहीं हुआ।
सगीर अंजम रजा का आरोप है कि बाद में चकेरी थाने में उनके और शफीक अहमद अंसारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। उनका दावा है कि पुलिस पर दबाव बनाकर उन्हें और उनके परिवार को परेशान किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रेसवार्ता के माध्यम से शिकायतकर्ता ने पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा कथित उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग की है।
मामले में लगाए गए 25 लाख रुपये की कथित वसूली, धरना-प्रदर्शन और पुलिस पर दबाव के आरोप शिकायतकर्ता के दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच और संबंधित दूसरे पक्ष के बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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