AKTU में डिग्री वितरण पर बड़ा सवाल: किसी को मिली डिग्री, कोई आज भी इंतजार में; आखिर छात्रों के साथ यह भेदभाव क्यों?
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) के 2025 बैच के बीटेक पासआउट विद्यार्थियों की डिग्री वितरण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कुछ विद्यार्थियों को डिग्री मिल चुकी है, जबकि कई छात्र एक साल से अधिक समय बाद भी अपनी मूल डिग्री का इंतजार कर रहे हैं। जनवरी 2026 में की गई शिकायतों पर विश्वविद्यालय ने किसी विद्यार्थी की डिग्री रोके जाने से इनकार किया था। बाद में प्रोविजनल डिग्री डाउनलोड की सुविधा शुरू हुई और करीब छह महीने बाद डिग्री डिजिलॉकर पर अपडेट की गई। ऐसे में सवाल है कि जब डिग्री जारी हो चुकी है तो सभी विद्यार्थियों तक समय पर क्यों नहीं पहुंची?
AKTU में डिग्री वितरण पर बड़ा सवाल: किसी को मिली डिग्री, कोई आज भी
इंतजार में; आखिर छात्रों के साथ यह भेदभाव क्यों?
लखनऊ/ बिंदास बोल न्यूज़ विशेष संवाददाता। उत्तर प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। प्रदेश के हजारों विद्यार्थी इस विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में पढ़ाई करते हैं और हर साल डिग्री लेकर अपने भविष्य की दिशा तय करते हैं। लेकिन अगर विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद भी विद्यार्थियों को समय पर उनकी डिग्री न मिले, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
AKTU के वर्ष 2025 के बीटेक पासआउट विद्यार्थियों की डिग्री वितरण प्रक्रिया को लेकर ऐसा ही मामला सामने आया है। कुछ विद्यार्थियों के घर उनकी डिग्री पहुंच चुकी है, लेकिन कई विद्यार्थी आज भी अपनी मूल डिग्री का इंतजार कर रहे हैं। स्थिति यह है कि कुछ छात्रों को समय पर प्रोविजनल डिग्री तक डाउनलोड करने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
सवाल यह है कि एक ही विश्वविद्यालय से, एक ही वर्ष में पास हुए विद्यार्थियों में किसी को डिग्री मिल गई और किसी को अब तक क्यों नहीं मिली?
जनवरी 2026 में शिकायत, विश्वविद्यालय ने क्या दिया जवाब?
इस मामले को लेकर Bindas Bol News ने जनवरी 2026 में विश्वविद्यालय से शिकायत की थी। शिकायत के जवाब में विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि ऐसा कोई विद्यार्थी नहीं है जिसकी डिग्री रोकी गई हो।
इसके बाद Bindas Bol News की ओर से दोबारा शिकायत की गई। इस बार भी विश्वविद्यालय की ओर से लगभग यही जवाब दिया गया।
लेकिन इसके दो-तीन दिन के भीतर ही विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रोविजनल डिग्री डाउनलोड होने की सुविधा शुरू हो गई। इससे एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा होता है कि जब विद्यार्थियों की डिग्री रोकी नहीं गई थी, तो फिर प्रोविजनल डिग्री डाउनलोड करने की सुविधा पहले से उपलब्ध क्यों नहीं थी?
छह महीने बाद डिजिलॉकर पर अपडेट हुई डिग्री
मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया। विद्यार्थियों की डिग्री करीब छह महीने बाद डिजिलॉकर पर बैकडेट में अपडेट की गई।
डिजिलॉकर पर डिग्री अपडेट होना निश्चित रूप से विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है, लेकिन इससे मूल डिग्री उनके घर तक पहुंचने का सवाल खत्म नहीं हो जाता।
आज एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी जिन विद्यार्थियों को मूल डिग्री नहीं मिली है, वे यह जानना चाहते हैं कि आखिर उनकी डिग्री कहां है और उन्हें कब तक मिलेगी?
क्या छात्रों के साथ हो रहा है समान व्यवहार?
संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और कानूनों के समान संरक्षण की गारंटी देता है। ऐसे में एक ही विश्वविद्यालय के समान स्थिति वाले विद्यार्थियों को डिग्री उपलब्ध कराने में अलग-अलग स्थिति क्यों है, यह सवाल विश्वविद्यालय प्रशासन से पूछा जाना चाहिए।
यह कहना कि हर मामले में अनुच्छेद 14 का उल्लंघन सिद्ध हो गया है, कानूनी जांच के बिना उचित नहीं होगा। लेकिन यदि समान परिस्थितियों वाले विद्यार्थियों के साथ बिना उचित कारण अलग व्यवहार किया जा रहा है, तो यह गंभीर समानता और प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न जरूर बनता है।
डिग्री केवल एक कागज नहीं है। यह विद्यार्थी की वर्षों की मेहनत, पढ़ाई और शैक्षणिक योग्यता का आधिकारिक प्रमाण है। इसके अभाव में उच्च शिक्षा, नौकरी, दस्तावेज सत्यापन और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में विद्यार्थियों को परेशानी हो सकती है।
विश्वविद्यालय प्रशासन से सीधे सवाल
AKTU प्रशासन को विद्यार्थियों के सामने इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए:
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वर्ष 2025 के सभी बीटेक पासआउट विद्यार्थियों की मूल डिग्री अब तक क्यों नहीं पहुंची?
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जिन विद्यार्थियों को डिग्री मिल चुकी है, उन्हें किन आधारों पर पहले डिग्री भेजी गई और बाकी विद्यार्थी क्यों प्रतीक्षा कर रहे हैं?
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जनवरी 2026 में शिकायत के जवाब में जब किसी विद्यार्थी की डिग्री रोके जाने से इनकार किया गया, तो प्रोविजनल डिग्री डाउनलोड की सुविधा बाद में क्यों शुरू हुई?
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डिजिलॉकर पर डिग्री अपडेट होने के बाद भी मूल डिग्री का वितरण क्यों लंबित है?
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जिन विद्यार्थियों को अब तक डिग्री नहीं मिली, उनके लिए विश्वविद्यालय ने क्या समय-सीमा निर्धारित की है?
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क्या विश्वविद्यालय सभी लंबित डिग्रियों की स्थिति सार्वजनिक करने को तैयार है?
छात्रों को जवाब चाहिए, सिर्फ आश्वासन नहीं
विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी कोई एहसान नहीं मांग रहे हैं। वे अपनी मेहनत से हासिल की गई शैक्षणिक योग्यता का आधिकारिक प्रमाण मांग रहे हैं। विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है कि डिग्री वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी हो और सभी पात्र विद्यार्थियों को बिना अनावश्यक देरी के उनकी डिग्री मिले।
AKTU में प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों और वर्तमान छात्रों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा केवल परीक्षा कराने और परिणाम जारी करने से नहीं बनती, बल्कि पढ़ाई पूरी होने के बाद विद्यार्थियों को समय पर जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने से भी बनती है।
Bindas Bol News का सवाल: अगर डिग्री जारी हो चुकी है, डिजिलॉकर पर उपलब्ध है और कुछ विद्यार्थियों को घर तक मिल भी चुकी है, तो बाकी विद्यार्थियों को उनकी मूल डिग्री के लिए एक साल से अधिक इंतजार क्यों करना पड़ रहा है? विश्वविद्यालय प्रशासन को इस सवाल का स्पष्ट और लिखित जवाब देना चाहिए।

