IDBI निजीकरण के विरोध में दूसरे दिन भी राष्ट्रव्यापी भूख हड़ताल, कर्मचारियों ने ₹81 के मूल्यांकन, Conflict of Interest और संसदीय जवाबदेही पर उठाए सवाल

IDBI Bank के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर 2 और 3 नवंबर 2026 को राष्ट्रव्यापी आंदोलन के दूसरे दिन भी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रदर्शन और भूख हड़ताल जारी रखी। कानपुर में कर्मचारियों ने केंद्र सरकार और LIC से IDBI Bank की प्रस्तावित 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री रोकने तथा बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को बनाए रखने की मांग की। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने ₹81 प्रति शेयर के प्रस्तावित IDBI सौदे और RBL Bank में Emirates NBD के ₹280 प्रति शेयर के निवेश का हवाला देते हुए मूल्यांकन में पारदर्शिता की मांग की। हालांकि दोनों लेन-देन की संरचना अलग है—IDBI में मौजूदा सरकारी एवं LIC हिस्सेदारी की बिक्री तथा RBL में नए शेयरों की सदस्यता—फिर भी कर्मचारियों ने IDBI के रणनीतिक मूल्य और भविष्य की कमाई क्षमता के स्वतंत्र परीक्षण की मांग उठाई। Fairfax की 14 अक्टूबर 2026 की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, IDBI Bank के प्रस्तावित अधिग्रहण के साथ Go Digit Life Insurance, Go Digit General Insurance और IIFL Capital Services में Fairfax की हिस्सेदारियों को IDBI Bank में योगदान करने की योजना भी प्रस्तावित की गई है। Fairfax ने स्पष्ट किया है कि ये प्रस्ताव आवश्यक नियामकीय, सरकारी, शेयरधारक तथा अन्य स्वीकृतियों के अधीन हैं और अभी अंतिम रूप से पूर्ण लेन-देन नहीं माने जा सकते। कर्मचारियों ने संभावित Conflict of Interest, Related Party Transactions, स्वतंत्र मूल्यांकन, आवश्यक disclosures और Companies Act, 2013 की धाराओं 166, 177, 184 और 188 के अनुरूप पारदर्शिता की मांग की। इन धाराओं में निदेशकों के कर्तव्य, हितों के टकराव, Audit Committee की भूमिका और संबंधित पक्षों के लेन-देन से जुड़े प्रावधान हैं। आंदोलनकारियों ने IDBI के ऐतिहासिक संसदीय महत्व को रेखांकित करते हुए मांग की कि बैंक के नियंत्रण में इतने बड़े बदलाव पर व्यापक संसदीय एवं सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। कर्मचारियों ने सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं, आरक्षण नीति और रोजगार के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र की सुरक्षा की लिखित गारंटी की भी मांग की।

IDBI निजीकरण के विरोध में दूसरे दिन भी राष्ट्रव्यापी भूख हड़ताल, कर्मचारियों ने ₹81 के मूल्यांकन, Conflict of Interest और संसदीय जवाबदेही पर उठाए सवाल
“IDBI निजीकरण के विरोध में दूसरे दिन भी राष्ट्रव्यापी आंदोलन”।
IDBI निजीकरण के विरोध में दूसरे दिन भी राष्ट्रव्यापी भूख हड़ताल, कर्मचारियों ने ₹81 के मूल्यांकन, Conflict of Interest और संसदीय जवाबदेही पर उठाए सवाल
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कानपुर, 3 नवंबर 2026।

📍IDBI Bank के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर 2 और 3 नवंबर को आयोजित राष्ट्रव्यापी आंदोलन के दूसरे दिन भी बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। कानपुर में कर्मचारियों ने केंद्र सरकार एवं LIC से IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री रोकने और बैंक की सार्वजनिक क्षेत्र की पहचान बनाए रखने की मांग की।

📌कानपुर में कर्मचारियों ने IDBI के निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार फूलबाग गांधी प्रतिमा स्थल पर भी बैंककर्मियों ने विरोध जताया।

🛑₹81 प्रति शेयर के प्रस्तावित सौदे पर मूल्यांकन का सवाल

केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को Fairfax Financial Holdings की पूर्ण स्वामित्व वाली सहयोगी कंपनी M/s 10955230 Canada Inc. को IDBI Bank की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए रणनीतिक खरीदार घोषित किया। प्रस्तावित सौदा ₹81 प्रति शेयर के हिसाब से लगभग ₹52,878 करोड़ का है। इसमें केंद्र सरकार की 30.48 प्रतिशत और LIC की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने इस मूल्यांकन पर सार्वजनिक बहस की मांग की। उनका कहना है कि IDBI Bank का मूल्यांकन करते समय उसके शाखा नेटवर्क, ग्राहक आधार, तकनीकी ढांचे, परिसंपत्तियों, मानव संसाधन, ब्रांड वैल्यू और भविष्य की कमाई की क्षमता को भी व्यापक रूप से देखा जाना चाहिए।

हालांकि, कर्मचारियों द्वारा IDBI के ₹81 और RBL Bank के ₹280 प्रति शेयर के आंकड़ों की तुलना करते समय दोनों सौदों की संरचना अलग होने की बात भी सामने रखी गई।

RBL Bank में Emirates NBD ने लगभग 60 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए ₹280 प्रति शेयर पर नए इक्विटी शेयरों की सदस्यता का प्रस्ताव किया है। RBL Bank के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार यह preferential issue के माध्यम से किया जाना है।

इसलिए केवल प्रति शेयर कीमत की तुलना से दोनों बैंकों का वास्तविक मूल्यांकन तय नहीं किया जा सकता। फिर भी IDBI के रणनीतिक मूल्य और प्रस्तावित बिक्री मूल्य का स्वतंत्र एवं पारदर्शी परीक्षण किए जाने की मांग कर्मचारियों ने उठाई है।

🔴Fairfax की कंपनियों को IDBI में शामिल करने की प्रस्तावित योजना पर सवाल

14 अक्टूबर 2026 की Fairfax की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, Fairfax ने IDBI Bank के अधिग्रहण के साथ Go Digit Life Insurance, Go Digit General Insurance तथा IIFL Capital Services में अपनी संबंधित हिस्सेदारियों को IDBI Bank में योगदान करने की प्रस्तावित योजना बताई है। Fairfax के अनुसार इन कंपनियों का योगदान उनके संबंधित बाजार मूल्यों पर किया जाना प्रस्तावित है।

Fairfax ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित Purchase Transaction तथा Contribution Transactions के लिए RBI, SEBI, IRDAI तथा अन्य आवश्यक सरकारी, नियामकीय और अन्य मंजूरियां आवश्यक हैं। कंपनी ने यह भी कहा है कि अभी इन प्रस्तावों से संबंधित कोई binding definitive agreement अंतिम रूप से निष्पादित नहीं हुआ है और लेन-देन वर्तमान प्रस्तावित शर्तों पर पूरा होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

इसी कारण कर्मचारियों ने मांग की कि प्रस्तावित व्यवस्था की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि IDBI Bank को इन संभावित कारोबारी व्यवस्थाओं से वास्तविक आर्थिक एवं व्यावसायिक लाभ क्या होगा।

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि यदि भविष्य में IDBI Bank के संसाधनों या अधिशेष पूंजी का उपयोग Fairfax समूह से संबंधित परिसंपत्तियों या कंपनियों से जुड़े लेन-देन में होता है, तो ऐसे मामलों में स्वतंत्र मूल्यांकन, निष्पक्ष निर्णय और सभी शेयरधारकों के हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

हालांकि कर्मचारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी मीडिया रिपोर्ट अथवा प्रस्तावित कारोबारी व्यवस्था को अंतिम लेन-देन या सिद्ध अनियमितता नहीं माना जाना चाहिए।

🛑Conflict of Interest और Companies Act के प्रावधानों पर सवाल

कर्मचारियों ने संभावित हितों के टकराव के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि IDBI के प्रस्तावित अधिग्रहणकर्ता से जुड़े समूह और IDBI Bank के बीच प्रस्तावित कारोबारी व्यवस्थाओं की स्वतंत्र समीक्षा जरूरी है।

Companies Act, 2013 की धारा 166(3) निदेशक से due and reasonable care, skill and diligence तथा independent judgment की अपेक्षा करती है, जबकि धारा 166(4) ऐसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हित वाले हालात से बचने की बात करती है जो कंपनी के हितों से टकरा सकते हों।

धारा 177 के तहत Audit Committee को संबंधित पक्षों के लेन-देन की स्वीकृति/समीक्षा तथा आवश्यक परिस्थितियों में inter-corporate loans और investments तथा assets के valuation जैसे विषयों पर भूमिका दी गई है।

वहीं धारा 188 Related Party Transactions से संबंधित है। इसमें निर्धारित प्रकार के संबंधित-पक्ष लेन-देन के लिए बोर्ड की स्वीकृति तथा निर्धारित परिस्थितियों में शेयरधारकों की मंजूरी का प्रावधान है। कानून में ordinary course of business और arm's length transactions से जुड़े प्रावधान भी हैं।

कर्मचारियों ने मांग की कि यदि किसी प्रस्तावित व्यवस्था पर Related Party Transaction से संबंधित प्रावधान लागू होते हैं, तो सभी आवश्यक disclosures, approvals, valuation और regulatory safeguards का पालन सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए।

🔴LIC निदेशक और Fairfax समूह से जुड़ी कंपनी के बोर्ड में नियुक्ति का मुद्दा

कर्मचारियों ने LIC के तत्कालीन स्वतंत्र निदेशक गुरुमूर्ति महालिंगम की Thomas Cook (India) Limited के बोर्ड में नियुक्ति का भी संदर्भ दिया।

Thomas Cook (India) की आधिकारिक कॉरपोरेट जानकारी के अनुसार गुरुमूर्ति महालिंगम को 19 दिसंबर 2025 से Additional Non-Executive Independent Director नियुक्त किया गया था और कंपनी के रिकॉर्ड में Life Insurance Corporation of India तथा Thomas Cook (India) दोनों में उनके directorships का उल्लेख किया गया है।

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि उस अवधि में यदि IDBI विनिवेश से संबंधित कोई निर्णय, चर्चा या प्रक्रिया उनके अधिकार-क्षेत्र अथवा भूमिका से जुड़ी थी, तो लागू disclosure और recusal requirements का पालन किस प्रकार हुआ।

हालांकि कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की दो संस्थाओं के बोर्ड में नियुक्ति मात्र से कोई कानूनी उल्लंघन स्वतः सिद्ध नहीं होता। वास्तविक भूमिका, उपलब्ध रिकॉर्ड और लागू कानूनी प्रावधानों की निष्पक्ष जांच ही स्थिति स्पष्ट कर सकती है।

📍IDBI के भविष्य पर संसद में व्यापक चर्चा की मांग

कर्मचारियों ने IDBI के ऐतिहासिक संसदीय महत्व को भी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया।

सरकारी दस्तावेजों के अनुसार 2002 में IDBI Act, 1964 को निरस्त कर IDBI को corporatise करने संबंधी विधेयक संसद में पेश किया गया था। बाद में IDBI (Transfer of Undertaking and Repeal) Act, 2003 के माध्यम से IDBI को वाणिज्यिक बैंक में बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कहा कि जिस संस्थान के स्वरूप में इतना बड़ा परिवर्तन विधायी प्रक्रिया से हुआ, उसके नियंत्रण में प्रस्तावित बड़े बदलाव पर भी व्यापक संसदीय और सार्वजनिक जवाबदेही होनी चाहिए।

📌उन्होंने सवाल उठाया—

“जिस IDBI को बनाने और बैंक में परिवर्तित करने के लिए संसद में चर्चा और विधायी प्रक्रिया हुई, उसके नियंत्रण को निजी हाथों में सौंपने जैसे बड़े निर्णय पर संसद में व्यापक चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए?”

कर्मचारियों ने कहा कि यह केवल शेयरों की खरीद-बिक्री का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था, जमाकर्ताओं के भरोसे, कर्मचारियों के भविष्य और वित्तीय क्षेत्र में सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़ा विषय है।

🛑कर्मचारियों के भविष्य और सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र की सुरक्षा की मांग

कर्मचारियों ने कहा कि IDBI Bank की सार्वजनिक पहचान ने वर्षों तक सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों के साथ बैंकिंग संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आंदोलनकारियों ने सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं, सरकारी आरक्षण नीति और कर्मचारियों के रोजगार के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र की लिखित सुरक्षा की मांग की।

🛑यूनाइटेड फोरम की प्रमुख पांच मांगें

United Forum of IDBI Officers & Employees ने आंदोलन के दौरान अपनी प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा—

👉1. भारत सरकार एवं LIC द्वारा IDBI Bank की प्रस्तावित 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी M/s 10955230 Canada Inc. को बेचने की प्रक्रिया रोकी जाए।

👉2. केंद्र सरकार IDBI Bank में न्यूनतम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बनाए रखे।

👉3. केंद्र सरकार की 51 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्सेदारी के साथ जमाकर्ताओं को Sovereign Guarantee प्रदान की जाए।

👉4. मौजूदा सेवा शर्तों, कल्याणकारी सुविधाओं, पेंशन एवं सरकारी आरक्षण नीति की लिखित गारंटी दी जाए।

👉5. IDBI Bank में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के रोजगार के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र की रक्षा की जाए।

🔴आंदोलन जारी रखने का ऐलान

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति, अधिकारी अथवा बैंक प्रबंधन के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि यह IDBI Bank के सार्वजनिक चरित्र, कर्मचारियों के अधिकारों और सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े व्यापक हितों की रक्षा का आंदोलन है।

दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी आंदोलन के दूसरे दिन कर्मचारियों ने कहा कि IDBI Bank के भविष्य और सार्वजनिक स्वरूप की रक्षा के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित निजीकरण प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने तथा कर्मचारियों, जमाकर्ताओं और व्यापक आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की अपील की।

🛑आंदोलनकारियों के प्रमुख सवाल

₹81 प्रति शेयर के IDBI सौदे के मूल्यांकन पर स्वतंत्र बहस क्यों नहीं?

क्या Fairfax की प्रस्तावित Contribution Transactions से IDBI Bank को वास्तविक व्यावसायिक लाभ होगा?

क्या संभावित Conflict of Interest की स्वतंत्र जांच और आवश्यक disclosures सुनिश्चित होंगे?

क्या Related Party Transactions से जुड़े सभी वैधानिक और नियामकीय प्रावधानों का पालन होगा?

IDBI Bank के नियंत्रण में इतने बड़े बदलाव पर संसद में व्यापक चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए?

🔴आंदोलनकारियों ने नारे लगाए—

📌“IDBI Bank बिकने नहीं देंगे, सार्वजनिक क्षेत्र से हटने नहीं देंगे।”

📌“बैंक बचाओ–देश बचाओ।”

📌“कर्मचारी एकता जिंदाबाद।”

📌“United Forum of IDBI Officers & Employees जिंदाबाद।”

📍सार्वजनिक स्पष्टीकरण

यह समाचार कर्मचारियों एवं उनके संगठन द्वारा उठाए गए सवालों, मांगों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित है। संभावित हितों के टकराव अथवा कारोबारी व्यवस्थाओं के संबंध में लगाए गए किसी आरोप को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। Fairfax की आधिकारिक घोषणा के अनुसार संबंधित खरीद एवं Contribution Transactions प्रस्तावित हैं और आवश्यक नियामकीय तथा अन्य स्वीकृतियों के अधीन हैं। अतः इन प्रस्तावों को अंतिम रूप से पूर्ण लेन-देन अथवा किसी सिद्ध अनियमितता के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।