सीएम जनसुनवाई पोर्टल में निस्तारण पर सवाल, दूसरे मामले की आख्या से शिकायत बंद करने का आरोप

कानपुर में मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज एक शिकायत के निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। शिकायतकर्ता प्रकाश वीर आर्य का आरोप है कि गोविन्द नगर ब्लॉक-8 के सार्वजनिक पार्क में अतिक्रमण एवं निर्माण से जुड़ी उनकी शिकायत में जो आख्या लगाई गई, वह कालिंदी नगर स्थित दूसरे पार्क की सफाई से संबंधित थी। मामले में उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने की मांग की गई है। कानपुर नगर निगम से जुड़ी मुख्यमंत्री जनसुनवाई की एक शिकायत में कथित तौर पर असंबंधित आख्या लगाए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता प्रकाश वीर आर्य के अनुसार उन्होंने गोविन्द नगर ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क में कथित अतिक्रमण एवं निर्माण तथा उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन को लेकर मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी थी। आरोप है कि शिकायत के जवाब में 9 सितंबर को लगाई गई आख्या में शिकायतकर्ता का नाम जितेन्द्र कुमार और स्थान कालिंदी नगर, जोन-5, वार्ड-50 का पार्क दर्ज था। शिकायतकर्ता ने इसे गंभीर प्रक्रिया संबंधी चूक बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

सीएम जनसुनवाई पोर्टल में निस्तारण पर सवाल, दूसरे मामले की आख्या से शिकायत बंद करने का आरोप
सीएम जनसुनवाई पोर्टल में निस्तारण पर सवाल, दूसरे मामले की आख्या से शिकायत बंद करने का आरोप

सीएम जनसुनवाई पोर्टल में निस्तारण पर सवाल, दूसरे मामले की आख्या से शिकायत बंद करने का आरोप

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🛑गोविन्द नगर ब्लॉक-8 के पार्क की शिकायत में कालिंदी नगर के दूसरे पार्क की आख्या लगाने का दावा, उच्चस्तरीय जांच की मांग

कानपुर। मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज एक शिकायत के निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि गोविन्द नगर ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क में कथित अतिक्रमण एवं निर्माण तथा उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन से संबंधित शिकायत में किसी दूसरे प्रकरण की आख्या लगा दी गई। इसके बाद शिकायत का निस्तारण कर दिया गया।

शिकायतकर्ता एवं व्यापारी नेता प्रकाश वीर आर्य के अनुसार उन्होंने 24 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री को स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिकायत भेजी थी। शिकायत गोविन्द नगर ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क में कथित अतिक्रमण एवं निर्माण तथा उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन से संबंधित थी।

📌आर्य के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यालय से मामला जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को भेजा गया। इसके बाद 25 अगस्त को शिकायत संख्या 12164260159269 दर्ज हुई।

पोर्टल के विवरण के अनुसार प्रकरण मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष सचिव नवनीत सिंह चहल की ओर से नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव स्तर को भेजा गया। वहां से 27 अगस्त को मामला नगर आयुक्त, नगर निगम को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजे जाने की जानकारी शिकायतकर्ता ने दी है। नगर आयुक्त स्तर से प्रकरण मुख्य अभियंता को अग्रसारित किया गया।

🔴आख्या में अलग शिकायतकर्ता और अलग स्थान

शिकायतकर्ता का आरोप है कि मुख्य अभियंता स्तर से 9 सितंबर को जो आख्या लगाई गई, वह उनकी शिकायत से संबंधित नहीं थी। उनके अनुसार आख्या में शिकायतकर्ता का नाम जितेन्द्र कुमार तथा विषय जोन-5, वार्ड संख्या 50, कालिंदी नगर स्थित पार्क की सफाई बताया गया है।

जबकि उनकी शिकायत गोविन्द नगर ब्लॉक-8 के सार्वजनिक पार्क में अतिक्रमण एवं निर्माण और उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन से संबंधित थी।

यही अंतर अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बन गया है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच की जाए कि उक्त आख्या मूल रूप से किस प्रकरण के लिए तैयार की गई थी और वह उनकी शिकायत के साथ किस स्तर पर तथा किस आधार पर जोड़ दी गई।

😎अधिकारियों की जांच-पड़ताल पर भी सवाल

आर्य का आरोप है कि शिकायतकर्ता का नाम, स्थान, पार्क और शिकायत का विषय अलग होने के बावजूद आख्या को उनकी शिकायत के निस्तारण में इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि इसके बाद भी प्रकरण आगे बढ़ता रहा और अंततः उसी आख्या के आधार पर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया।

उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक जनसुनवाई पोर्टल के अनुसार यह व्यवस्था नागरिकों की शिकायतों को दर्ज करने, संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने, उनकी स्थिति देखने और निस्तारण पर प्रतिक्रिया देने के लिए बनाई गई है। पोर्टल यह भी बताता है कि निस्तारण की गुणवत्ता के संबंध में शिकायतकर्ता फीडबैक दे सकता है और उच्च अधिकारी निस्तारित संदर्भ को पुनः जीवित कर सकते हैं।

सरकार की उपलब्ध जनसुनवाई संबंधी जानकारी में यह भी उल्लेख है कि अधीनस्थ अधिकारी की आख्या प्राप्त होने के बाद संबंधित अधिकारी उसे अनुमोदित कर सकते हैं, आपत्ति के साथ वापस कर सकते हैं, अग्रेतर कार्रवाई के लिए लंबित रख सकते हैं या दूसरे अधीनस्थ कार्यालय को भेज सकते हैं।

ऐसे में शिकायतकर्ता का सवाल है कि यदि किसी प्रकरण में शिकायत और आख्या के मूल विवरण में ही अंतर था तो उसका मिलान किस स्तर पर किया गया।

😡“यह छोटी प्रशासनिक भूल नहीं”

प्रकाश वीर आर्य ने कहा कि शिकायतकर्ता, स्थान, पार्क और विषय अलग होने के बावजूद किसी अन्य प्रकरण की आख्या लगाकर शिकायत का निस्तारण किया जाना गंभीर मामला है।

उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि गलत आख्या लगाने से लेकर उसे आगे बढ़ाने और शिकायत के निस्तारण तक किन-किन अधिकारियों की भूमिका रही।

🤔“जनसुनवाई व्यवस्था पर सवाल”

आर्य का कहना है कि जनसुनवाई पोर्टल आम नागरिकों की शिकायतों के समाधान और उनकी निगरानी की व्यवस्था है। ऐसे में यदि किसी शिकायत में दूसरी शिकायत की आख्या लगाकर निस्तारण किया गया है तो इसकी जांच जरूरी है।

उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की जांच कराने और यदि जांच में आरोप सही पाए जाएं तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

🎤शिकायतकर्ता का छोटा बयान

“मेरी शिकायत गोविन्द नगर ब्लॉक-8 के पार्क से संबंधित थी, लेकिन आख्या में कालिंदी नगर के दूसरे पार्क का उल्लेख है।”

📍— प्रकाश वीर आर्य, शिकायतकर्ता

👉एक और सवाल

“जब शिकायतकर्ता, स्थान और विषय अलग थे तो निस्तारण से पहले शिकायत और आख्या का मिलान क्यों नहीं हुआ?”

📌— शिकायतकर्ता द्वारा उठाया गया सवाल

 🛑 जांच से ही स्पष्ट होगी जिम्मेदारी

फिलहाल उपलब्ध विवरण के आधार पर यह मामला शिकायत के निस्तारण की प्रक्रिया और आख्या के मिलान से जुड़े गंभीर सवाल उठाता है। यह निर्धारित करना जांच का विषय होगा कि असंबंधित आख्या वास्तव में किस प्रकरण की थी, वह इस शिकायत में कैसे संलग्न हुई और निस्तारण के विभिन्न स्तरों पर उसका परीक्षण किस प्रकार किया गया।