टेंडर घोटाले की जांच के बीच ठेकेदारों पर दबाव का आरोप, नगर निगम में फिर गरमाया सिंडिकेट का मामला
कानपुर नगर निगम में कथित टेंडर घोटाले की जांच के बीच ठेकेदारों पर दबाव बनाने के आरोप सामने आए हैं। शिकायतों में आरोप है कि एक सिंडिकेट दूसरे ठेकेदारों को टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं होने के लिए डराने-धमकाने का प्रयास कर रहा है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने मामले की जांच शुरू कराई है। पुलिस और नगर निगम पहले से ही टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, फर्मों की भूमिका और ठेकेदारों के सिंडिकेट की जांच कर रहे हैं। Description: कानपुर नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। कथित टेंडर घोटाले की जांच तथा कई एफआईआर के बीच अब दूसरे ठेकेदारों को निविदा प्रक्रिया से दूर रखने के लिए दबाव और धमकी दिए जाने की शिकायत सामने आई है। नगर निगम प्रशासन मामले की जांच कर रहा है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है।
टेंडर घोटाले की जांच के बीच ठेकेदारों पर दबाव का आरोप, नगर निगम में फिर गरमाया सिंडिकेट का मामला
कानपुर। कानपुर नगर निगम में कथित टेंडर घोटाले की जांच के बीच ठेकेदारों पर दबाव बनाने का एक नया मामला सामने आया है। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि एक संगठित सिंडिकेट के जरिए दूसरे ठेकेदारों को नगर निगम की निविदा प्रक्रिया में शामिल नहीं होने के लिए डराया-धमकाया जा रहा है। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कराई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब नगर निगम के टेंडर और ठेका प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर पुलिस और विशेष जांच टीम पहले से जांच कर रही है। जांच के दौरान टेंडर आवंटन, फर्मों के पंजीकरण, भुगतान और कथित सिंडिकेट की भूमिका से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा चुकी है। एसआईटी नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर संबंधित फाइलों और दस्तावेजों की जांच भी कर चुकी है।
जांच का शिकंजा कसने के बाद बदली रणनीति का आरोप
नगर निगम से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, टेंडर प्रकरण में कार्रवाई तेज होने के बाद कथित सिंडिकेट की कार्यप्रणाली में बदलाव की आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि अब कुछ ठेकेदारों को जांच और कार्रवाई का भय दिखाकर नगर निगम के टेंडरों से दूर रहने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की अभी जांच चल रही है और किसी व्यक्ति की भूमिका को दोष सिद्ध मानना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
गुरुजी’ नाम से चर्चित ठेकेदार भी जांच के दायरे में
मामले में कुछ ब्लैकलिस्टेड ठेकेदारों के अलावा अन्य प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी जांच की बात सामने आई है। पुलिस के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक नगर निगम में ‘गुरुजी’ के नाम से चर्चित ठेकेदार और प्रोफेसर राजेश शुक्ला की भी तलाश किए जाने की बात कही गई है।
ऐसे में यह जांच का महत्वपूर्ण पहलू बन गया है कि क्या टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किसी संगठित समूह ने दूसरे ठेकेदारों पर दबाव बनाया था।
टेंडर प्रक्रिया पर दिख रहा असर
टेंडर प्रकरण में कार्रवाई के बाद नगर निगम की निविदा प्रक्रिया पर भी असर पड़ा है। 10 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार 1.60 करोड़ रुपये के 19 हॉट मिक्स कार्यों के लिए एक भी निविदा प्राप्त नहीं हुई थी। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने ऐसे कार्यों की दोबारा निविदा कराने और अन्य विभागों से जुड़ी फर्मों को भी प्रक्रिया में शामिल करने की बात कही थी।
इससे पहले नगर निगम द्वारा कई टेंडर निरस्त किए जाने और दोबारा प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई थी। विभिन्न रिपोर्टों में निरस्त टेंडरों की राशि अलग-अलग बताई गई है; इसलिए पूरे पैकेज की राशि को लेकर अंतिम आधिकारिक आंकड़े का इंतजार किया जाना उचित होगा।
छह एफआईआर, गिरफ्तारियां और जांच
टेंडर प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई भी जारी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नगर निगम से संबंधित शिकायतों पर पांच एफआईआर तथा एक अन्य शिकायत पर फजलगंज थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। मामले में ठेकेदार रज्जन बाजपेई और संदीप जैन की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है, जबकि कथित सिंडिकेट का सरगना बताए जा रहे गोविंद शर्मा की तलाश जारी रही है।
जांच में टेंडर, फर्म पंजीकरण और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है। एसआईटी ने नगर निगम मुख्यालय से कई दस्तावेज एकत्र किए हैं।
ब्लैकलिस्ट फर्मों की संख्या भी बढ़ी
नगर निगम ने कथित अनियमितताओं से जुड़ी फर्मों के खिलाफ ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की है। अगस्त के अंत तक प्रकाशित रिपोर्टों में ब्लैकलिस्ट की गई फर्मों की संख्या छह बताई गई थी, जबकि अन्य बाद की रिपोर्टों में सात फर्मों के ब्लैकलिस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई।
आरोप सही मिले तो होगी कड़ी कार्रवाई
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि यदि ठेकेदारों को टेंडर प्रक्रिया से दूर रखने के लिए धमकी, दबाव या किसी संगठित सिंडिकेट की भूमिका के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच का अहम सवाल यही है कि क्या टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए केवल कुछ ठेकेदारों का आपसी गठजोड़ था या इसके पीछे कोई व्यापक नेटवर्क काम कर रहा था। जांच पूरी होने के बाद ही इसकी वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
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