कानपुर नगर निगम में फर्म पंजीकरण पर सवाल, अधूरे दस्तावेजों के बावजूद रजिस्ट्रेशन; आठ फाइलों की जांच में मिली गड़बड़ी
कानपुर नगर निगम में फर्मों के पंजीकरण और नवीनीकरण में नियमों के पालन को लेकर जांच में कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। सीडीओ अभिनव जे जैन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने नगर निगम से उपलब्ध कराई गई 20 पंजीकरण फाइलों में से आठ की रैंडम जांच की। कई फाइलों में जरूरी दस्तावेज और प्रमाणपत्र नहीं मिले तथा दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया में एकरूपता नहीं पाई गई। अब जांच का अगला चरण टेंडर प्रक्रिया से जुड़े स्वीकृत और निरस्त टेंडरों के कारणों पर केंद्रित होगा।Kanpur Nagar Nigam में फर्म पंजीकरण और नवीनीकरण में अनियमितताओं की जांच में अधूरे दस्तावेजों का मामला सामने आया। सीडीओ की अध्यक्षता वाली समिति ने आठ फाइलों की रैंडम जांच की।
कानपुर नगर निगम में फर्म पंजीकरण पर सवाल, अधूरे दस्तावेजों के बावजूद रजिस्ट्रेशन
कानपुर। नगर निगम में फर्मों के पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया को लेकर जांच में कई गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि कुछ फर्मों का पंजीकरण और नवीनीकरण जरूरी दस्तावेजों के पूर्ण सत्यापन के बिना किया गया। बाद में उन्हीं दस्तावेजों में कमियां पाए जाने पर कुछ फर्मों के खिलाफ ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की गई।
सीडीओ अभिनव जे जैन की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने नगर निगम से उपलब्ध कराई गई फर्म पंजीकरण की 20 फाइलों में से आठ फाइलों की रैंडम जांच की। जांच में कई फाइलों में जरूरी दस्तावेज नहीं मिले। कमेटी ने पंजीकरण प्रक्रिया में एकरूपता नहीं होने और नियमों के पालन में खामियां मिलने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी है।
नगर निगम में कुल 509 फर्में पंजीकृत बताई गई हैं। जांच का दायरा केवल पंजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि फर्मों को टेंडर देने की प्रक्रिया और उसमें नियमों के पालन को भी जांच के दायरे में लिया गया है।
आयकर, टर्नओवर और योग्यता के दस्तावेजों पर सवाल
जांच के दौरान सामने आया कि कुछ फर्मों की फाइलों में आयकर, टर्नओवर, योग्यता से जुड़े प्रमाणपत्र और आवश्यक एनओसी सहित कई दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। इससे फर्मों के पंजीकरण के समय दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।
कमेटी ने यह भी देखा कि अलग-अलग फर्मों के पंजीकरण में दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के मानकों में एकरूपता थी या नहीं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इसी बिंदु पर कई फाइलों में प्रक्रिया संबंधी कमियां सामने आई हैं।
हॉटमिक्स प्लांट की अनिवार्यता भी जांच के घेरे में
नगर निगम में बड़े सड़क निर्माण कार्यों से जुड़ी फर्मों के लिए हॉटमिक्स प्लांट की अनिवार्यता का मुद्दा भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि कुछ नई बड़ी फर्मों के आवेदन में कमियां निकालकर उन्हें प्रक्रिया से बाहर किया गया, जबकि कुछ अन्य फर्मों के दस्तावेजों में कमियां होने के बावजूद उनका पंजीकरण किया गया।
जांच के दौरान बड़े कार्यों में फर्मों की भागीदारी और टेंडर प्रक्रिया में कथित पूलिंग के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है। करीब 24 बड़ी फर्मों के नाम इस संदर्भ में सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
पिछले करीब सात वर्षों में नगर निगम के छह जोनों में होने वाले बड़े कार्यों में कुछ उन्हीं फर्मों की लगातार भागीदारी रहने की बात भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।
नगर निगम ने सभी दस्तावेज नहीं कराए उपलब्ध
जांच कमेटी ने वर्ष 2024-25 और 2025-26 में हुए कार्यों, टेंडरों और पूरी प्रक्रिया से संबंधित फाइलें नगर निगम से मांगी थीं। हालांकि उपलब्ध कराई गई सामग्री में फर्म पंजीकरण से संबंधित 20 फाइलें ही अधिकारियों को उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है।
कमेटी ने पहले चरण में फर्म पंजीकरण की प्रक्रिया की जांच की है। अब टेंडर प्रक्रिया में स्वीकृत और निरस्त किए गए टेंडरों के कारणों की जांच की जानी है।
कर्मचारियों पर भी कार्रवाई
फर्म पंजीकरण में निगरानी नहीं करने और दस्तावेजों के सत्यापन में लापरवाही के मामले में नगर निगम अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता अमनदीप सिंह, अवर अभियंता बालेंद्र कुमार और वरिष्ठ लिपिक भूपेंद्र सिंह को निलंबित किया जा चुका है।
इसके अलावा लंबे समय से नगर आयुक्त के व्यक्तिगत सहायक की सीट पर तैनात लिपिक संजय कटियार, रहमान और दिनेश प्रसाद का तबादला किया गया था।
नगर निगम से जुड़े अन्य मामलों में भी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मार्गप्रकाश प्रकरण में नगर आयुक्त की ओर से 12 कर्मचारियों के निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है।
जांच का अगला चरण टेंडर प्रक्रिया पर
सीडीओ अभिनव जे जैन के अनुसार, जांच के पहले चरण में फर्मों के पंजीकरण की प्रक्रिया को देखा गया है और रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। अब टेंडर प्रक्रिया में स्वीकृत और निरस्त किए गए टेंडरों के कारणों की जांच की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पूरी जांच जल्द पूरी कर रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
नगर निगम से जुड़े टेंडर प्रकरण में इससे पहले भी फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने, एफआईआर दर्ज होने और एसआईटी द्वारा फर्मों तथा टेंडर से जुड़े दस्तावेजों की जांच किए जाने की कार्रवाई सामने आ चुकी है।
अभिनव जे जैन, सीडीओ:
“पहले चरण में फर्मों के पंजीकरण को लेकर जांच की गई है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। अब टेंडर प्रक्रिया में स्वीकृत और निरस्त किए गए टेंडरों के कारणों की जांच होगी। जल्द पूरी जांच कर रिपोर्ट सौंपी जाएगी।”
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