करोड़पति कारोबारी का बेटा कानपुर जेल में गुमसुम, पत्नी की रिहाई की खबर से हुआ खुश; 5 दिन से मुलाहिजा बैरक में
करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के आरोप में उनका बेटा सुब्रत पांच दिन से कानपुर जेल में बंद है। जेल अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती दिनों में वह तनाव में और गुमसुम रहा तथा रात में गर्मी के कारण बेचैन रहा। फिलहाल उसे मुलाहिजा बैरक में रखा गया है। पत्नी शालू की 28 सितंबर को रिहाई की खबर सुनकर सुब्रत के खुश होने की बात जेल अधिकारियों ने बताई।
बिंदास बोल न्यूज़ विशेष संवाददाता
करोड़पति कारोबारी का बेटा कानपुर जेल में गुमसुम
कानपुर। करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के आरोप में उनका बेटा सुब्रत मिनोचा पांच दिन से कानपुर जेल में बंद है। जेल अधिकारियों के मुताबिक, घर में सुख-सुविधाओं के बीच रहने वाला सुब्रत जेल पहुंचने के बाद शुरुआती दिनों में काफी तनाव में नजर आया।
जेल अधीक्षक राजेश पांडेय के अनुसार, अब तक सुब्रत से मिलने के लिए उसके परिवार का कोई सदस्य जेल नहीं पहुंचा है।
पहले दिन पूरे दिन गुमसुम रहा
जेल अधिकारियों के मुताबिक, जेल में आने के पहले दिन सुब्रत काफी तनाव में दिखा। वह पूरे दिन गुमसुम बैठा रहा और अन्य बंदियों से ज्यादा बातचीत नहीं की।
रात में उमस और गर्मी के कारण वह काफी बेचैन रहा। जेल प्रशासन की ओर से खाने के बारे में पूछे जाने पर उसने खाना खाने से मना कर दिया और पूरी रात कुछ नहीं खाया।
अगले दिन उसे नाश्ते में दलिया, गुड़ और चाय दी गई। अधिकारियों के मुताबिक, अब वह धीरे-धीरे अन्य बंदियों से बातचीत करने लगा है।
फिलहाल मुलाहिजा बैरक में रखा गया
सुब्रत को फिलहाल मुलाहिजा बैरक में रखा गया है। जेल में नए बंदियों की शुरुआती निगरानी और स्वास्थ्य जांच के लिए इस बैरक का इस्तेमाल किया जाता है।
जेल अधिकारियों के अनुसार, करीब 14 दिन बाद जेल के नियमों के मुताबिक उसकी बैरक निर्धारित की जाएगी।
पत्नी शालू की रिहाई की खबर से हुआ खुश
जेल अधिकारियों के मुताबिक, सुब्रत जेल में बंद शालू के बारे में लगातार पूछता था और उससे मिलने की इच्छा भी जताता था।
28 सितंबर को शालू के जेल से रिहा होने की जानकारी मिलने के बाद सुब्रत काफी खुश नजर आया।
शालू उसी रात करीब 1 बजे जेल से रिहा होकर लखनऊ के ठाकुरगंज स्थित अपने घर पहुंची।
21 दिन बाद बेटे से मिली शालू
परिवार के मुताबिक, घर पहुंचने के बाद शालू सबसे पहले अपने बेटे श्रीजय के पास गई। उस समय श्रीजय सो रहा था। शालू ने उसके माथे को चूमा और करीब 10 मिनट तक उसे निहारती रही।
करीब 21 दिन बाद बेटे को सामने देखकर शालू भावुक हो गई और उसकी आंखों से आंसू निकल आए। इसके बाद वह अपनी मां के गले लगकर भी काफी देर तक रोती रही। बेटी को भावुक देखकर उसके पिता नरेश अरोड़ा भी अपने आंसू नहीं रोक सके।
सुबह मां को देखकर बेटे से लिपट गया श्रीजय
नरेश अरोड़ा के मुताबिक, 29 सितंबर की सुबह करीब 7 बजे श्रीजय की नींद खुली। सामने मां शालू को देखकर वह बेहद खुश हो गया और उनसे लिपट गया।
परिवार के अनुसार, इसके बाद श्रीजय पूरे दिन अपनी मां के साथ रहा और एक पल के लिए भी उन्हें अपनी नजरों से दूर नहीं होने दे रहा था। शालू ने अपने हाथ से बेटे को खाना खिलाया।
मंगलवार को पूरे दिन रिश्तेदार और परिचित भी शालू से मिलने के लिए उनके घर पहुंचते रहे।
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