कानपुर नगर निगम के केयरटेकर विभाग पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, 8 माह में खानपान पर 73 लाख खर्च की शिकायत; जांच शुरू
कानपुर नगर निगम के केयरटेकर विभाग में कथित वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत के बाद जांच शुरू हो गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फर्मों के माध्यम से भुगतान, फर्जी बिल, खानपान के नाम पर आठ माह में करीब 73 लाख रुपये खर्च और कागजों में सबमर्सिबल पंप लगाने जैसी अनियमितताएं हुईं। जिलाधिकारी के निर्देश पर एडीएम सिटी ने नगर आयुक्त से जांच रिपोर्ट मांगी है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने अपर नगर आयुक्त प्रथम को जांच सौंपी है। नगर निगम पिछले करीब आठ वर्षों में केयरटेकर विभाग के नए और पुराने कार्यों, खरीद, बिल, भुगतान और फर्मों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रहा है।
कानपुर नगर निगम के केयरटेकर विभाग पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, 73 लाख के खानपान खर्च की शिकायत; आठ साल के कामों की जांच
कानपुर। कानपुर नगर निगम के केयरटेकर विभाग में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत के बाद जांच शुरू हो गई है। शिकायत में केयरटेकर पर पारिवारिक सदस्यों और सहकर्मियों के साथ मिलकर फर्म संचालित करने तथा उसी के माध्यम से सरकारी भुगतान कराए जाने के आरोप लगाए गए हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारी के नाम पर फर्म बनाकर कथित फर्जी बिलों के आधार पर भुगतान कराने का आरोप भी शिकायत में लगाया गया है।
शिकायत के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी नगर ने नगर आयुक्त को मामले की जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजा है। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने मामले की जांच अपर नगर आयुक्त प्रथम को सौंपी है। नगर निगम के आधिकारिक संपर्क विवरण में अर्पित उपाध्याय को नगर आयुक्त तथा अपर नगर आयुक्त प्रथम के रूप में अनूप कुमार का उल्लेख है।
खानपान पर आठ महीने में करीब 73 लाख खर्च का आरोप
सेवाग्राम कॉलोनी, दादानगर निवासी राकेश मिश्र की ओर से मुख्यमंत्री कार्यालय में की गई शिकायत में केयरटेकर विभाग के खर्च और खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि केयरटेकर विभाग में खानपान के नाम पर करीब आठ महीने के दौरान लगभग 73 लाख रुपये खर्च किए गए। शिकायत में एक ही कंपनी के नाम से खरीदारी किए जाने तथा बिलों और भुगतान की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की गई है।
हालांकि, यह आंकड़ा शिकायत में लगाए गए आरोप का हिस्सा है। इसकी वास्तविकता का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों, बिलों, भुगतान अभिलेखों और जांच रिपोर्ट से ही हो सकेगा। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में इस खर्च को लेकर अलग-अलग आंकड़ों का उल्लेख भी सामने आया है।
कागजों में सबमर्सिबल पंप लगाने का आरोप
शिकायत में पूर्व केयरटेकर के कार्यकाल में कराए गए कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर कागजों में सबमर्सिबल पंप लगाए जाने और उनके नाम पर भुगतान किए जाने का उल्लेख किया गया, जबकि मौके पर स्थिति अलग होने की बात कही गई है।
इसके अलावा विकास कार्यों के लिए एडवांस राशि लेने और उसके उपयोग को लेकर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं। इन आरोपों की भी जांच की जा रही है।
आठ वर्षों के कार्यों का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा
मामले में नगर निगम के केयरटेकर विभाग में पिछले करीब आठ वर्षों के नए और पुराने कार्यों की जांच किए जाने की बात सामने आई है। जांच के दौरान खरीद प्रक्रिया, फर्मों, बिलों, भुगतान और कराए गए विकास कार्यों से संबंधित अभिलेखों का मिलान किया जाएगा।
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के अनुसार अपर नगर आयुक्त प्रथम को मामले की पूरी जांच कर जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी जिम्मेदारी
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। जांच के दौरान यदि दस्तावेजों और मौके के सत्यापन में वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों या अन्य जिम्मेदार पक्षों की भूमिका के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।
नगर निगम के केयरटेकर विभाग से जुड़े इस मामले में अब जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मकता है और सरकारी धन के खर्च में किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं।
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