मंत्री बोले- सड़कें ठीक-ठाक मिलीं, जमीनी पड़ताल में 4 प्रमुख मार्गों पर 300 से ज्यादा गड्ढे

कानपुर में सड़कों की जमीनी हकीकत मंत्री के बयान से अलग नजर आई। उच्च शिक्षा मंत्री एवं कानपुर प्रभारी योगेंद्र उपाध्याय ने बुधवार को कहा था कि जिस रास्ते से वह कानपुर आए, वहां सड़कें ठीक-ठाक मिलीं और कोई गड्ढा नहीं दिखा। इसके बाद शुक्रवार को सर्किट हाउस से जुड़े चार प्रमुख मार्गों की पड़ताल की गई, जहां 300 से अधिक छोटे-बड़े गड्ढे नजर आए। कई जगह सड़क उखड़ी मिली, जबकि कुछ गड्ढों में बारिश का पानी, मिट्टी और बजरी जमा थी। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने सड़क की खराब हालत को लेकर परेशानी बताई। यह पड़ताल ऐसे समय हुई है जब जाजमऊ से सर्किट हाउस जाने वाले मार्ग पर बारिश के दौरान सड़क धंसने और बड़े गड्ढे बनने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।

Sep 19, 2026 - 00:49
Sep 19, 2026 - 00:59
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मंत्री बोले- सड़कें ठीक-ठाक मिलीं, जमीनी पड़ताल में 4 प्रमुख मार्गों पर 300 से ज्यादा गड्ढे

मंत्री बोले- सड़कें ठीक-ठाक मिलीं, जमीनी पड़ताल में 4 प्रमुख मार्गों पर 300 से ज्यादा गड्ढे

कानपुर। उच्च शिक्षा मंत्री एवं कानपुर के प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय बुधवार को सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार पहुंचे थे। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि जिस रास्ते से वह कानपुर आए, वहां सड़कें ठीक-ठाक मिलीं और कोई गड्ढा नहीं दिखा।

मंत्री के इस बयान के बाद शुक्रवार को सर्किट हाउस आने-जाने वाले प्रमुख रास्तों की जमीनी पड़ताल की गई। पड़ताल के दौरान चार प्रमुख मार्गों पर करीब 300 से ज्यादा छोटे-बड़े गड्ढे नजर आए। कहीं सड़क की ऊपरी परत उखड़ी मिली तो कहीं गड्ढों में बारिश का पानी, मिट्टी और बजरी जमा थी।

दोपहिया वाहन चालक गड्ढों से बचकर निकलते नजर आए। वहीं ऑटो, ई-ऑटो और कारें खराब हिस्सों से गुजरते समय झटके खाती दिखीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन रास्तों की खराब हालत नई नहीं है और बारिश के बाद कई जगह समस्या और बढ़ गई है।

चार प्रमुख रास्तों पर सड़क की पड़ताल

सर्किट हाउस से जुड़े चार प्रमुख मार्गों की पड़ताल के दौरान कैंट के गोलाघाट क्षेत्र में कई स्थानों पर सड़क उखड़ी मिली। छोटे-बड़े गड्ढों के साथ कुछ जगहों पर बारिश का पानी जमा था। सड़क पर मिट्टी और बजरी भी बिखरी हुई दिखाई दी।

गड्ढों से बचने के लिए दोपहिया वाहन चालकों को कई बार अचानक दिशा बदलनी पड़ रही थी। कुछ स्थानों पर वाहन चालकों को रफ्तार कम करके निकलना पड़ा। ई-ऑटो और कारें भी गड्ढों से गुजरते समय हिचकोले खाती नजर आईं।

इससे पहले जाजमऊ से सर्किट हाउस जाने वाले मार्ग पर बारिश के दौरान सड़क धंसने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। जुलाई में इसी मार्ग पर सड़क धंसने से करीब सात फीट गहरा गड्ढा बनने की रिपोर्ट सामने आई थी। अगस्त में सरैयां चौराहे के पास सड़क धंसने से करीब 18 फीट गहरा गड्ढा बनने की भी रिपोर्ट हुई थी।

स्थानीय लोगों ने बताई सड़क की स्थिति

स्थानीय निवासी भूपेंद्र कुमार ने कहा, "जब मंत्री जी आए थे, तो उनके लिए इधर एक भी गड्ढा नहीं था। उसके बाद सड़क पर गड्ढे हो गए। कैंट के गोलाघाट की सड़क मंत्री जी को दिखाई नहीं दी। रोड कम है और गड्ढे ज्यादा हैं।"

स्थानीय निवासी अखलास अहमद ने कहा कि वीआईपी आवाजाही वाले रास्तों पर आम लोगों को होने वाली परेशानी भी देखी जानी चाहिए। उनके मुताबिक गड्ढों के कारण राहगीरों के घायल होने का खतरा बना रहता है और प्रशासन को पूरे शहर की सड़कों की स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए।

मुकेश कन्नौजिया ने बताया कि सड़कों की खराब हालत को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन जमीन पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दिया। उन्होंने कहा, "कल भी गड्ढे थे और आज भी हैं। गड्ढों के चलते सड़क नजर नहीं आती।"

सात महीने से देख रहे हैं सड़क की हालत

उन्नाव से रोज कानपुर आने वाले शिवम पाल ने बताया कि वह पिछले करीब सात महीने से इन रास्तों से आ रहे हैं। उनके मुताबिक इस दौरान सड़क की हालत में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।

ई-ऑटो चालक जुनैद ने बताया कि वह रोज इस सड़क पर 20 से अधिक चक्कर लगाते हैं। उनका कहना है कि सड़क पर गड्ढों के कारण ई-रिक्शा के असंतुलित होकर पलटने का खतरा बना रहता है।

मंत्री ने कहा था- बारिश के बाद सड़कें दुरुस्त होंगी

उच्च शिक्षा मंत्री एवं कानपुर के प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय बुधवार को सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि जिस रास्ते से वह आए, वहां सड़कें ठीक-ठाक मिली हैं। उन्होंने कहा था कि लौटते समय अगर कोई सड़क खराब मिलेगी तो उसे भी देखते हुए जाएंगे।

मंत्री ने यह भी कहा था कि बारिश का असर हर शहर में होता है और बारिश खत्म होने के बाद सड़कों को दुरुस्त किया जाता है।

हालांकि, इसके बाद की जमीनी पड़ताल में सर्किट हाउस से जुड़े चार प्रमुख मार्गों पर 300 से अधिक छोटे-बड़े गड्ढे नजर आए। इससे सड़क की वास्तविक स्थिति और प्रशासनिक दावों के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अब सवाल यह है कि सर्किट हाउस जैसे प्रमुख और वीआईपी आवागमन वाले मार्गों की नियमित निगरानी और मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी है और इन गड्ढों को कब तक दुरुस्त किया जाएगा?

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