कानपुर कचहरी में अधिवक्ता के खिलाफ कथित वसूली के दबाव की शिकायत, धीरज चड्ढा ने निष्पक्ष जांच की मांग
कानपुर कचहरी की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग को लेकर धीरज चड्ढा ने अधिवक्ता अमित कुमार गुप्ता के खिलाफ मुख्यमंत्री और पुलिस आयुक्त, कानपुर नगर को शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके खिलाफ चार लाख रुपये की कथित वसूली के लिए दबाव बनाया गया तथा परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दाखिल कुछ परिवादों की पृष्ठभूमि और संबंधित चेक के वास्तविक लेन-देन की जांच की जानी चाहिए। शिकायत में अन्य व्यक्तियों से जुड़े कुछ परिवादों का भी उल्लेख किया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस समय उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से नहीं हो सकी है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि आरोप सही पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
कानपुर कचहरी में अधिवक्ता के खिलाफ कथित वसूली के दबाव की शिकायत, धीरज चड्ढा ने निष्पक्ष जांच की मांग
कानपुर। कानपुर कचहरी की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग को लेकर धीरज चड्ढा ने अधिवक्ता अमित कुमार गुप्ता के खिलाफ मुख्यमंत्री एवं पुलिस आयुक्त, कानपुर नगर को प्रार्थना पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता धीरज चड्ढा का आरोप है कि उनके साथ चार लाख रुपये की कथित वसूली के लिए दबाव बनाया गया। उनका कहना है कि उन्होंने पुलिस को इस संबंध में दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि अधिवक्ता अमित कुमार गुप्ता की ओर से अन्य लोगों के विरुद्ध परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत परिवाद दाखिल किए गए हैं और इन मामलों में संबंधित चेक, कथित लेन-देन तथा परिवाद दाखिल किए जाने की परिस्थितियों की जांच आवश्यक है।
शिकायत में इन मामलों का उल्लेख
शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार—
1. मो. शोएब आलम का मामला:
परिवाद संख्या 64956, वर्ष 2023, अमित कुमार गुप्ता बनाम मो. शोएब आलम, धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, थाना ग्वालटोली, कानपुर नगर। शिकायतकर्ता के अनुसार इस मामले में दो लाख रुपये की रकम तथा दो लाख रुपये के चेक से संबंधित विवाद का उल्लेख है।
2. मो. फैसल का मामला:
परिवाद संख्या 29252, वर्ष 2025, अमित कुमार गुप्ता बनाम मो. फैसल, धारा 138 एनआई एक्ट, थाना ग्वालटोली, कानपुर नगर। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस मामले में आठ लाख रुपये के चेक के आधार पर परिवाद दाखिल किया गया।
3. कुदन मिश्रा का मामला:
परिवाद संख्या 41117, वर्ष 2024, अमित कुमार गुप्ता बनाम कुदन मिश्रा, धारा 138 एनआई एक्ट, थाना ग्वालटोली, कानपुर नगर। शिकायतकर्ता के अनुसार इस मामले में दो लाख रुपये की रकम और चेक से संबंधित विवाद का उल्लेख है।
4. धीरज चड्ढा का मामला:
परिवाद संख्या 67977, वर्ष 2026, अमित कुमार गुप्ता बनाम धीरज चड्ढा, धारा 138 एनआई एक्ट, थाना ग्वालटोली, कानपुर नगर।
इन चारों परिवादों के संबंध में दिए गए विवरण की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ऑनलाइन स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए इनका उल्लेख शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत विवरण के आधार पर किया जा रहा है।
संबंधित लेन-देन की जांच की मांग
धीरज चड्ढा का कहना है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित चेक किन परिस्थितियों में दिए गए थे और उनके पीछे वास्तविक लेन-देन क्या था। उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि किसी कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल कथित तौर पर दबाव बनाकर धन वसूलने के लिए किया गया है तो उस पहलू की भी जांच होनी चाहिए।
शिकायतकर्ता ने कहा कि मामला केवल उनके व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए। यदि अन्य लोगों की ओर से भी इसी प्रकार की शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी भी जांच की जानी चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया का किसी भी प्रकार से अनुचित इस्तेमाल न हो और किसी निर्दोष व्यक्ति पर मुकदमे के दबाव में धन देने की स्थिति न बने।
अन्य व्यक्तियों के संबंध में भी लगाए आरोप
शिकायत में धीरज चड्ढा ने आशीष शुक्ला उर्फ बिल्लू एडवोकेट और विनोद गुप्ता उर्फ बिन्नू के संबंध में भी आरोप लगाए हैं और उनके तथा अमित कुमार गुप्ता के बीच कथित मिलीभगत की जांच की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए इन दावों को शिकायतकर्ता के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
कचहरी की गरिमा से जुड़ा मामला बताया
शिकायतकर्ता ने कहा कि कानपुर कचहरी में बड़ी संख्या में अधिवक्ता पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ वादकारियों को न्याय दिलाने का कार्य कर रहे हैं। किसी एक व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों को पूरे अधिवक्ता समाज से जोड़ना उचित नहीं है। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति द्वारा अधिवक्ता के रूप में मिली पहचान का कथित रूप से दुरुपयोग किया जाता है तो इससे न्याय व्यवस्था और ईमानदारी से कार्य कर रहे अधिवक्ताओं की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।
धीरज चड्ढा ने पुलिस आयुक्त से मांग की है कि उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, संबंधित परिवादों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता सामने लाई जाए। उनका कहना है कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि कानपुर कचहरी की गरिमा और आम वादकारियों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास कायम रहे।
नोट: इस समाचार में वर्णित आरोप शिकायतकर्ता धीरज चड्ढा द्वारा लगाए गए हैं। आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अथवा अंतिम निष्कर्ष समाचार प्रकाशित किए जाने के समय उपलब्ध नहीं है। संबंधित अधिवक्ता/अन्य आरोपित पक्ष का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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