कानपुर में महिला के ₹69 लाख के ऋण में कथित फर्जीवाड़े का आरोप: बैंक कर्मचारियों व चार्टर्ड अकाउंटेंट पर मिलीभगत से रकम हड़पने का दावा, वर्षों बाद भी न्याय की गुहार
कानपुर में एक महिला ने वर्ष 2015 में स्वीकृत करीब ₹69 लाख के ऋण में बैंक कर्मचारियों और बैंक से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट पर कथित मिलीभगत कर ऋण की रकम दूसरे खातों में स्थानांतरित कराने, बिना अनुमति चेक का इस्तेमाल करने और बाद में दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला के अनुसार उसने मामले की शिकायत पुलिस सहित विभिन्न उच्च अधिकारियों और संस्थाओं से की, जिसके बाद वर्ष 2016 में मुकदमा भी दर्ज हुआ, लेकिन उसका दावा है कि उसे अब तक न्याय नहीं मिला। शिकायत में बैंक खाते को एनपीए किए जाने तथा बाद में घर की नीलामी की धमकी देने के भी आरोप लगाए गए हैं।
कानपुर में महिला के ₹51 लाख के ऋण में कथित फर्जीवाड़े का आरोप, बैंक कर्मचारियों व चार्टर्ड अकाउंटेंट की मिलीभगत का दावा
कानपुर। कल्याणपुर क्षेत्र की रहने वाली एक महिला ने बैंक कर्मचारियों और बैंक से जुड़े एक चार्टर्ड अकाउंटेंट पर गंभीर वित्तीय अनियमितता एवं धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। महिला द्वारा संपादक के नाम भेजे गए लिखित प्रार्थना-पत्र के अनुसार वर्ष 2015 में उसके नाम करीब ₹48 लाख का कैश क्रेडिट (CC) और ₹21 लाख का होम लोन, यानी कुल करीब ₹69लाख की ऋण सुविधा स्वीकृत की गई थी।
📍महिला का आरोप है कि ऋण स्वीकृत होने के बाद बैंक कर्मचारियों ने कथित रूप से उसकी जानकारी और अनुमति के बिना सीसी खाते से जारी चेकों के माध्यम से बड़ी रकम दूसरे खातों में स्थानांतरित कर दी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उसी दिन दूसरे खाते से भी लाखों रुपये निकाले गए।
🛑फ्रॉड की जानकारी हुई तो बैंक अधिकारियों से की शिकायत
शिकायत के मुताबिक जब महिला को कथित लेन-देन की जानकारी हुई तो उसने बैंक के उच्चाधिकारियों से शिकायत की। महिला का आरोप है कि शिकायत के बाद उसके खाते की ओवरलिमिट करीब ₹3.85 लाख कर दी गई, जबकि उसने इसके लिए कोई आवेदन नहीं किया था।
शिकायत में दावा किया गया है कि 1 जनवरी 2016 को उसके खाते से एक लूज चेक के माध्यम से करीब ₹3.85 लाख निकाल लिए गए, जबकि महिला के अनुसार उसने उस चेक के लिए कोई आवेदन अथवा अनुमति नहीं दी थी।
📍पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने का दावा
महिला के अनुसार उसने कथित बैंक फ्रॉड की शिकायत पुलिस में भी की। शिकायत-पत्र में कहा गया है कि पुलिस जांच के बाद मुकदमा संख्या 702/2016 दर्ज किया गया था। दस्तावेज में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं का उल्लेख करते हुए बैंक कर्मचारियों एवं संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई का दावा किया गया है।
महिला का कहना है कि मामले की जांच के दौरान बैंक के कर्मचारियों और संबंधित सीए को थाने बुलाया गया तथा गिरफ्तार किए जाने का भी उल्लेख शिकायत में है।
📌₹12 लाख वापस किए जाने और जबरन हस्ताक्षर कराने का आरोप
शिकायत में महिला ने दावा किया है कि 29 दिसंबर 2016 को उसके खाते में ₹12 लाख वापस किए गए, लेकिन उसी दिन उसके कथित रूप से लूज चेक पर जबरदस्ती हस्ताक्षर करा लिए गए।
महिला का आरोप है कि इसके बाद बैंक कर्मचारियों ने कथित रूप से समझौता कराने का दबाव बनाया और वर्ष 2018 तक ब्याज पर ब्याज लगाए जाने की स्थिति बनी रही। शिकायत के अनुसार बाद में जब महिला ने खाता ऑपरेट नहीं किया तो उसका खाता एनपीए हो गया।
📍घर नीलाम करने की धमकी देने का भी आरोप
महिला ने अपने प्रार्थना-पत्र में आरोप लगाया है कि इसके बाद बैंक कर्मचारी उसके घर पहुंचे और कथित तौर पर धमकी दी कि यदि पूरी रकम जमा नहीं की गई तो उसका मकान और एजेंसी नीलाम कर दी जाएगी।
📌शिकायत में कहा गया है कि इस कथित दबाव और धमकियों के कारण महिला को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
🛑PMO से लेकर विभिन्न संस्थाओं तक शिकायत का दावा
शिकायतकर्ता के अनुसार उसने कथित मामले की जांच और न्याय की मांग को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तथा बैंक के उच्चाधिकारियों सहित विभिन्न स्तरों पर प्रार्थना-पत्र भेजे।
महिला का दावा है कि लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद संबंधित बैंक कर्मचारियों के विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और उसे केवल आश्वासन मिलता रहा।
🛑2016 की घटना, लेकिन सवाल आज भी कायम
यह मामला वर्ष 2015-16 के बैंक लेन-देन से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार पुलिस में मुकदमा दर्ज किए जाने का भी दावा किया गया है। अब महिला ने एक बार फिर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, बैंक खातों एवं संबंधित लेन-देन की फोरेंसिक जांच तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाई है।

